धनला.पाली। निम्बडिय़ा नाडी! ये मात्र नाडी ही नहीं है, बल्कि इससे भगोड़ा गांव के लोगों की आस्था भी जुड़ी हुई है। अतीत पर नजर डालें तो 60 साल पहले ये नाडी अस्तित्व में आई थी, वो भी तब जब गांव में पहली बार भाई-बहनों के प्रेम के प्रतीक के रूप में यहां समद डोवण का आयोजन किया जाना था। तब गांव में उत्तर दिशा की ओर प्रवेश मार्ग से पानी की आवक को देखते हुए घने नीम के वृक्षों के बीच इस नाडी की खुदाई की गई थी। संयोग ही रहा कि पहली ही बारिश में नाडी छलछला उठी थी। राजस्थानी की धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यताओं के कारण प्रदेश में जल संचयन और संरक्षण को प्रोत्साहन तो मिलता ही आया है। इसी तर्ज पर भगोड़ा गांव की निम्बडिय़ा नाडी भी पहली बार हुए समद डोवण की साक्षी बन गई और सैकड़ों बहनों ने सरोवर का पूजन व परिक्रमा कर समुद्र मंथन की परश्वपरा को साकार किया था। बुजुर्ग ग्रामीणों की मानें तो निम्बडिय़ा नाडी का नाम जुबां पर आते ही आंखों में चमक आ जाती हैं और इससे जुड़ी धार्मिक व सांस्कृतिक स्मृतियां दृष्टि पटल के आगे छा जाती है। नाडी में लोक देवता बाबा रामदेवजी का प्राचीन मंदिर इस आस्था को और भी प्रगाढ़ करता है।
अस्तित्व खोती नाडी को अमृतं जलम् से जीवनदान
60 वर्ष पूर्व खोदी गई भगोड़ा गांव की निम्बडिय़ा नाडी संरक्षण के अभाव में अपना अस्तित्व खो रही है। यहां कभी घने नीम के पेड़ थे, वहां अब कंटीली झाडिय़ां है। लोगों की धार्मिक आस्था का केन्द्र रही यह नाडी अपने सौन्दर्य को पूरी तरह से खो चुकी है। लेकिन, अब राजस्थान पत्रिका के जल संरक्षण के पुनीत अभियान अमृतं जलम् के द्वारा ग्रामीणों की सहभागिता से भगोड़ा गांव की इस निम्बडिय़ा नाडी का स्वरूप संवरेगा। इधर, सरपंच रतनसिंह रावत ने बताया कि बेंगलूरु के प्रवासी चुन्नीनाथ पुत्र भंवरनाथ ने नाडी में स्थित ग्रामीणों की आस्था के केंद्र प्राचीन बाबा रामदेव मंदिर के जीर्णोद्धार करवाने का बीड़ा उठाया है।





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