-मासूम बच्चों को बिस्तर के नीचे दबाया
-साठ हजार की नकदी सहित एक लाख का माल लूटा
चित्तौडग़ढ़
यहां भोईखेड़ा इलाके में आधी रात बाद घर में घुसे लाठियों से लेस करीब दर्जन भर लुटेरों ने कमरे में सो रहे दंपती पर प्राण घातक हमला कर दिया। दंपती के पहने हुए सोने-चांदी के आभूषण व साठ हजार रूपए की नकदी सहित करीब एक लाख रूपए का माल लूट ले गए। लुटेरों को घर में देख महिला बोली कि जो चाहिए वो ले जाओ पर बच्चों को मत मारना।
जानकारी के अनुसार भोई खेड़ा निवासी रामलाल (४६) पुत्र गोमा भोई, उसकी पत्नी प्यारीबाई (४२), नातीन सल्लू (६) व पौत्र कम्मू (५) मकान के एक कमरे में सो रहे थे। सोमवार को आधी रात बाद करीब पौने तीन बजे लाठियों से लेस करीब दर्जन भर लुटेरे वहां पहुंचे और कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गए। कूलर की आवाज और गहरी नीन्द में होने से गृहस्वामी व उसकी पत्नी को लुटेरों के आने का पता नहीं चल सका। लुटेरों ने कमरे में खंूटी पर टंगी रामलाल की पेंट की तलाशी लेकर उसमें रखे साठ हजार रूपए निकाल लिए। रामलाल खान पर मजदूरी करता है और कल ही मजदूरी की एकत्रित हुए यह राशि लेकर वह घर पहुंचा था। लुटेरों ने पूरे कमरे की तलाशी लेने के बाद वहां सो रहे रामलाल पर ल_ से वार कर दिया। चिल्लाने पर उसकी पत्नी प्यारी बाई की भी नींद खुल गई। लुटेरों ने प्यारी बाई व रामलाल के पहने हुए सोने के मांदलिए, मोती, रामनामी, कान के टॉप्स, आठ हजार रूपए की चांदी की पायजेब, चांदी की चेन आदि खुलवा लिए। इसके बाद भी लुुटेरों ने और माल निकालने को कहा। जिस पलंग पर दंपती व बच्चे सो रहे थे, उस पलंग की भी तलाशी ली। विरोध करने पर लुटेरों ने गृहस्वामी पर ल_ से वार कर हाथ तोड़ दिया। प्यारी बाई के हाथ की कोहनी पर दांतली से वार कर लहूलुहान कर दिया। दंपती के चिल्लाने पर वहां गश्त कर रहा नेपाली चौकीदार भाग कर आया, लेकिन तब तक लुटेरे करीब एक लाख का माल लूट कर वहां से भाग छूटे। बाद मे आस-पड़ोस के लोगों की भी जाग हो गई, जो मौके पर पहुंचे। बाद में दंपती को सांवलियाजी अस्पताल ले जाया गया। मंगलवार को सुबह गृहस्वामी को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसके हाथ का ऑपरेशन किया गया।
सूचना मिलने पर रात को करीब सवा तीन बजे कोतवाली से सहायक उप निरीक्षक दाड़मचंद व पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंचा और वारदात के बारे में जानकारी ली।
जो चाहिए वो ले लो पर बच्चों को मत मारना
प्यारी बाई ने बताया कि लुटेरे हमला कर रहे थे, तब उसे मासूम नातिन और पौत्र को बचाने की चिन्ता हो रही थी। वह बार-बार लुटेरों से यही करती रही कि तुम्हें जो चाहिए वो ले लो, लेकिन बच्चों को मत मारना। इसके बाद लुटेरों ने प्यारी बाई के गले, कान व पैरों में पहने हुए आभूषण खुलवा लिए।
बच्चों को बिस्तर के नीचे दबाया
प्यारी बाई ने बताया कि हमले के दौरान दोनों बच्चों की भी नीन्द खुल गई थी, जो मारपीट होते देख सहम गए थे। लुटेरों ने दोनों बच्चों पर वहां रखे बिस्तर डाल दिए। काफी देर तक बच्चों का बिस्तर के नीचे दबे होने से दम घुटता रहा। बाद में प्यारी बाई ने दोनों बच्चों पर से बिस्तर हटाए।
आस-पड़ोस के मकानों पर लगाए कुंदे
लुटेरों ने वारदात को अंजाम देने से पहले रामलाल के आस-पड़ोस में रहने वाले श्यामलाल भोई, अर्जुनलाल आदि के मकानों के मुख्य द्वार के कुंदे व सांकळें लगा दी, ताकि एकाएक कोई मकानों से बाहर नहीं आ सके। हल्ला होने पर आस-पड़ोस के लोग मकान से बाहर आने लगे, लेकिन कुंदे व सांकळें लगी होने से वे नहीं आ सके। बाद में कुंदे खुलवाकर वे रामलाल के घर पहुंचे।
बेटा-बहू व मां भी नहीं थी
यह भी संयोग रहा कि लूट की वारदात के दौरान रामलाल की मां रूकमा, पुत्र रतनलाल व बहू भी नहीं थी। रतनलाल गाड़ी चलाने का काम करता है, इसलिए बाहर गया हुआ था। रूकमा भी अपनी बेटी के घर गई हुई थी और बहू पीहर गई हुई थी। वारदात की जानकारी मिलने पर मंगलवार को सुबह ये सब घर लौटे।
खुले बरामदे में है दो कमरे
रामलाल खदान पर मजदूरी करता है। उसने कई माह तक मजदूरी करके साठ हजार रूपए कमाए थे। उसके मकान में कोई चार दीवारी नहीं है। खुले बरामदे में ही पास-पास दो कमरे बने हुए होने से लुटेरे आसानी से कमरे में घुस गए। दूसरे कमरे पर ताला लगा हुआ था, जहां लुटेरे नहीं गए।





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