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संभल जाइए! आपके बच्चों को भी हो सकता है ये सब

-कोशिकाओं में हो सकता है बदलाव
चित्तौडग़ढ़
बच्चों को मोबाइल पर अंगुलियां थिरकाते देख भले ही मॉर्डन पापा-मम्मी के खुशी का ठिकाना नहीं रहता हो, लेकिन हकीकत तो यह है कि लम्बे समय तक मोबाइल का उपयोग बच्चों को कैंसर का तोहफा दे सकता है। यही नहीं उनके दिमाग को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
जिन घरों में छोटे बच्चे हैं, वे अक्सर पापा-मम्मी के एनरॉयड फोन की तरफ आकर्षित होते हैं। उस पर वीडियो गेम खेलते और अंगुलियां थिरकाते देख परिजनों के चेहरे चमके बिना नहीं रहते, लेकिन इस आधुनिकता के चलते वे इस बात से अनजान है कि मोबाइल कैंसर के साथ जेनेटिक बीमारियां पैदा कर सकता है। बड़ों के मुकाबले बच्चों को मोबाइल का रेडिएशन जल्दी गिरफ्त में लेता है। इन सब पर शोध भी हो चुका है। यह भी सच है कि तत्काल तो इसके दुष्प्रभाव सामने नहीं आते, लेकिन पांच-छह साल और इससे अधिक समय से मोबाइल के अधिक उपयोग से दुष्प्रभावों का पता चला जाता है।
स्कूलों में सिर्फ नाम का प्रतिबंध
आधुनिकता के चलते अब बच्चे स्कूलों में भी मोबाइल का उपयोग करने लगे हैं। जबकि इसके दुष्परिणामों को देखते हुए स्कूलों में इसके उपयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध भी लगाया गया, लेकिन यह प्रतिबंध सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया। मोबाइल से निकलने वाली किरणें शुरुआत में बच्चों के दिमाग को कमजोर बनाती है। इससे याददाश्त में कमी और लम्बे समय बाद ट्यूमर और कैंसर सहित कई क्रॉनिक बीमारियां सामने आ सकती है।
इसलिए हटवाए थे टॉवर
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पहले भी स्कूलों से सौ मीटर दायरे में स्थापित मोबाइल टॉवर हटाने के आदेश दिए थे। इसके पीछे सरकार की भी यही मंशा रही कि टॉवर से निकलने वाले रेडिएशन का स्कूली बच्चों पर दुष्प्रभाव नहीं पड़े। जिला कलक्टरों को भी इस संबंध में निर्देश देकर राज्य के सभी जिलों से रिपोर्ट भी मांगी गई थी।
कोशिकाएं हो सकती हैं नष्ट
सांवलियाजी अस्पताल के पीएमओ डॉ. मधुप बक्षी का कहना है कि मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने पर शरीर की कोशिकाएं नष्ट हो सकती है। बच्चों में इसके दुष्परिणाम जल्दी सामने आते हैं। अत्यधिक उपयोग से कैंसर जैसी क्रॉनिक बीमारियों की संभावना भी बढ़ जाती है।
शारीरिक, मानसिक व रिश्तों में दूरियां
सांवलियाजी अस्पताल के वरिष्ठ शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. जयसिंह मीणा का कहना है कि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों की सेहत पर शारीरिक, मानसिक प्रभाव तो पड़ता ही है। साथ ही परिवार से दूरियां भी बढ जाती है। ज्यादा उपयोग से मानसिक विकृति, आंखों, हृद्य की कमजोरी के साथ ही दिमाग और कान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा मोबाइल पर गेम्स खेलने से बच्चे आक्रमक मानसिकता की तरफ बढ सकते हैं।



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