चन्दनसिंह देवड़ा/उदयपुर . आदिवासी बहुल उदयपुर जिले में आंगनवाड़ी केन्द्रों की सूरत भामाशाहों के सहयोग से बदल रही है लेकिन आज भी ऐसे कई केन्द्र हैं जो किराए के भवन में चल रहे हैं। इनमें से कइयों की हालत ऐसी है कि किराए का भवन भी टूटा केलूपोश टापरा है। भामाशाहों के सरकार और विभाग के साथ अनुबंध के बाद जिले में 213 आंगनवाड़ी केन्द्र स्मार्ट बन रहे हैं जिनमें से कुछ का काम तो पूरा भी हो गया है। जिले के 15 में से 4 ब्लॉक ऐसे है, जहां पर विभाग के पास जमीन का पट्टा नहीं होने से खुद का भवन तक नहीं बना पाया है। स्मार्ट केन्द्र ‘नंदभवन’ में पढऩे वाले कान्हा खूब मस्ती करते हैं वहीं टूटे टापरों में सुदामाओं को सुविधाओं की दरकार है।
वन विभाग नहीं देता पट्टा
जिले के कोटड़ा, झाड़ोल, गिर्वा और सराड़ा ब्लॉक में वन विभाग की जमीन होने से महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनवाड़ी केन्द्र के लिए पट्टा जारी नहीं हो पाया है। ऐसे में विभाग कई जगह स्वयं के भवन नहीं बना पा रहा है। विभागीय तालमेल की कमी के कारण यह स्थिति बनी हुई है। शहर में भी विभाग के पास खुद के भवन नहीं है जिससे कई केन्द्र किराए के भवन में चल रहे हैं।
जिले का गणित....
कुल आंगनवाड़ी केन्द्र- 3174
नामांकित बच्चे- सवा लाख के करीब
स्मार्ट केन्द्र- 213
किराए के भवन में केन्द्र- 276
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केस-01
कोटड़ा के वडेरा फला में आंगनवाड़ी टूटे-फूटे टापरे में चल रही है, वहीं निचली सुबरी में बिना छत की आंगनवाड़ी संचालित है। वडेरा फला में तो आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत भी हुआ लेकिन भ्रष्टाचार के चलते उसकी छत तक नहीं डली। 12 वर्ष से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस केन्द्र के बच्चों को बिना किराए दिए एक टापरे में पढ़ाने को मजबूर है। इसमें सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। जिले में 200 से ज्यादा आंगनवाड़ी केन्द्र किराए के भवन में ही संचालित है।
केस-02
मावली के थामला में वेदांता के सहयोग के स्मार्ट आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित है। इसी तरह जिले में पहले चरण में 20 केन्द्र बनाए गए जबकि अभी कोटड़ा, झाड़ोल, गिर्वा, सराड़ा और मावली ब्लॉक में करीब 100 नए केन्द्र बनाए जा रहे हैं जिन्हें नंदघर नाम दिया गया है। 93 केन्द्र भामाशाह गोद देकर संचालित कर रहे हैं। इन स्मार्ट आंगनवाड़ी केन्द्रों पर सोलर लाइट, पानी, शौचालय और खेलकूद के अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं।
इनका कहना....
कोटड़ा और झाड़ोल में हमारे पास आंगनवाड़ी भवन नहीं है जिसकी वजह वन विभाग की जमीन पर पट्टा नहीं मिलना है। कुछ पट्टे हासिल किए हैं। प्रयास कर अन्य के भी पट्टे लेंगे ताकि नंदघर की तरह साधन-सुविधाएं सभी बच्चों को मिल सकें। - महावीर खराड़ी, उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग





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