सीकर. हल्की आहट पर सतर्क लेकिन नील गाय और बंदर नजर आने से निराश हुए। जिले में वन्य जीव गणना पहले दिन शनिवार को खराब मौसम की भेंट चढ़ गई। नमी के कारण और जगह-जगह पानी भरने के कारण वन्य जीव अपने स्थानों पर दुबके रहे। वनकर्मियों को शनिवार शाम तक वन्य जीव नजर ही नजर आए। सीकर, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़ और नीमकाथाना रेंज केवल बंदर, नील गाय ही नजर आई। धाराजी में दोपहर तक महज 250 बंदर, पांच नील गाय और कुछ मोर नजर आए। वनकर्मियों का दावा है कि शाम को बघेरा, भेडिया, जरख जैसे वन्य जीव नजर आएंगे। देर रात तक आकाश में बादलों का डेरा होने के कारण वन्य जीव गणना प्रभावित हुई। देर रात मचान पर बैठे वन कर्मी आवाज सुनकर ही वन्य जीवों का अंदाज लगाते रहे। जिले में वन्य गणना शनिवार सुबह आठ बजे से शुरू हुई गणना लगातार 24 घंटे रविवार सुबह आठ बजे तक चलेगी।
धूप के चलते सन्नाटा
जिले में शनिवार को दिनभर तेज धूप के चलते वन क्षेत्रों में सन्नाटा रहा। कर्मचारियों को केवल दिनभर बंदर,मोर ही नजर आए। पहाड़ों से वन्य जीवों की हलचल शुरु हुई। नीलगाय ही वाटर प्वॉइंटों पर पानी पीते हुए दिखी। रामगढ शेखावाटी में भी हरिणों के झुंड पर नजर नहीं आए। कोट बांध पर सारस का जोड़ा, बालवाड में भेडियों का कुनबा भी नहीं दिखा।
नहीं है संसाधन
जिले का 90 फीसदी वन क्षेत्र नीमकाथाना इलाके में है। जहां पिछले हर गणना में बघेरे और शावक और सांभर होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद पगमार्क भी उठाए लेकिन इसके बाद भी वन कर्मचारियों को पदचिन्हों के आधार पर बघेरे व अन्य वन्य जीवों के वाटर प्वाइंट पर आने के रास्ते का अनुमान लगाने के लिए प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया।
160 कर्मी, 84 पॉइंट
जिले में वन्यजीव गणना में 84 प्वाइंट पर 160 कर्मचारी लगे हुए हैं। सबसे अधिक प्वाइंट नीमकाथाना व पाटन रेंज में है। गणना अधर शिला, बालेश्वर, टपकेश्वर, लादीकाबास, कालाकोटा, डोकन, भीतरों, रैयां का बास सहित अन्य प्वॉइंट पर दिन में मोर व बंदर सहित अन्य जीव ही पानी पीने आये। क्षेत्र में हिंसक जानवरों की गणना के लिए कर्मचारी शनिवार रात को मचान पर बैठे रहे।





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