चौबड़ीवाला (कुण्डल). चौबड़ीवाला गांव के बालाजी ढाणी में बडोली आश्रम के संत विवेकानन्द सरस्वती की अध्यक्षता में आयोजित तीन दिवसीय षष्ठम् अन्तरराज्यीय संत सम्मेलन में मंगलवार को विभिन्न राज्यों से आए संतों के प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सम्मेलन में पंजाब आश्रम के संत हरि चेतन ने कहा कि मुक्ति ज्ञान से होती है, कर्म उपासना से नहीं। बड़ोली आश्रम के संत स्वामी विवेकानन्द सरस्वती ने कहा कि मुंडन करवाने से मुक्ति नहीं मिलती है। ज्ञान अर्जित करके जीवन में उतारने से ही मुक्ति मिल सकती है। आगरा के संत रमेशानन्द दास ने कहा कि सत्संग का मुख्य उद्देश्य आपस में प्रेम करना, बुराइयों से दूर रहना, परिवार में शांति तथा बुरे कर्मों को छोड़कर अच्छे कर्मों की ओर अग्रसर होना है।
वृन्दावन आश्रम के संत आनन्द चेतन ने कहा कि अच्छे मार्ग पर बढ़ते चलना ही मनुष्य का श्रेष्ठ कर्तव्य है। रलावता दौसा आश्रम के संत जयचन्ददास ने कहा कि सत्संग के द्वारा अनेकता में एकता का बोध होता है। बाणे का बरखेड़ा आश्रम की साध्वी लक्ष्मी गिरि ने कहा कि सत्संग विवेक है, विवेक से ज्ञान, ज्ञान से मुक्ति तथा मुक्ति से दु:खों का हरण होता है।
सनेर की डूंगरी आश्रम के संत घनश्यामदास ने कहा कि परोपकार करना ही सबसे बडा पुण्य है, पराई आत्माओं को दु:ख देना ही सबसे बड़ा पाप है। इस मौके पर आयोजित संगीत और भजनों की धुनों पर महिला श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। सरदार सिंह, राजेश माल, संतोष, विश्राम माल, रामराज, रामजीलाल गुर्जर, कन्हैयालाल पटेल, छंगाराम माल सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।
दर्जनों गांवों के उमड़ रहे श्रद्धालु
समिति संरक्षक रत्तीराम गुर्जर ने बताया कि संत सम्मेलन में प्रवचन सुनने के लिए कुण्डल, खोर्रा खुर्द, दुड़की, चौबड़ीवाला, भांवता, भांवती, बड़ोली, सिण्डोली, खड़का, भेड़ोली, जामा, चांदेरा, उरवाड़ी, गुढ़ाकटला, कालोता सहित दर्जनों गांवों व ढाणियों के ग्रामीण बड़ी संख्या में कार्यक्रम स्थल पर पहुंच रहे।
पिलाई ठण्डाई, बांटे फल
संत सम्मेलन में समिति की ओर से प्रवचन सुनने आए श्रद्धालुों को प्रत्येक घण्टे में ठण्डाई, लस्सी पिलाकर कई बार फल वितरित किए गए।





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