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देश व दुनिया में स्वाभिमान व शौर्य का प्रतीक चित्तौडग़ढ़ आज मना रहा स्थापना दिवस


चित्तौडग़ढ़. देश व दुनिया में स्वाभिमान व शौर्य का प्रतीक चित्तौडग़ढ़ रविवार को वैशाख शुक्ल अष्टमी को अपनी स्थापना दिवस मना रहा है। इस दिवस को चित्तौड़ी आठम के रूप में मनाया जाता है। ये दिन चित्तौड़ के इतिहास में बहुत खास है। सातवीं से लेकर १४वीं सदी तक इस तिथि को दुर्ग पर चतरंग मोरी, सूर्य मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, मां कालिका की प्रतिमा स्थापना, हम्मीर की चित्तौड़ विजय जैसे कार्य इसी दिन हुए थे। १४वीं सदी में राणा हम्मीर ने मालदेव सोनगरा को पराजित कर फिर से चित्तौड़ दुर्ग पर जिस दिन अपना अधिकार जमाया वो वैशाख शुक्ला अष्टमी का ही दिन था। मान्यता है कि दुर्ग पर सूर्य मंदिर में कालिका माता की स्थापना करने के उपलक्ष्य में चित्तौड़ी आठम मनाने का सिलसिला शुरू हुआ जो किन्हींं कारणों से वर्ष १९५८ में बंद हो गया था। जय चित्तौड़ चित्तौड़ी आठम महोत्सव समिति की ओर से वर्ष २००८ से ये फिर मनाया जा रहा है। समिति की ओर से इस मौके पर चित्तौड़ की गौरवमय विरासत की याद दिलाने वाले विभिन्न कार्यक्रम किए जाते है। राजस्थान में गौरव व स्वाभिमान का प्रतीक चित्तौडग़ढ़ विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल कर नाम रोशन कर रहा है।
सुबह मंदिर पर चढ़ाएंगे ध्वजा, शाम को रंगोली सजा करेंगे दीपदान
जय चित्तौड़ चित्तौडी आठम महोत्सव समति की ओर से प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी रविवार को चित्तौडग़ढ़ का स्थापना दिवस चित्तौड़ी आठम पर विभिन्न कार्यक्रम आयेाजित किए जाएंगे। चित्तौड़ी आठम महोत्सव समिति के अध्यक्ष मुकेश नाहटा ने बताया कि रविवार सुबह 7 बजे ध्वजा लेकर कार्यकर्ता कालिका माता मन्दिर पहुंचेगे व विधि विधान के साथ ध्वजा चढाई जाएगी। चित्तौडग़ढ़ की सुख शांति एवं समृद्धि के लिए यज्ञ हवन किया जाएगा। वहीं शाम को सुभाष चौक पर रंगोली बनाकर जय चित्तौड़ जय मेवाड़ लिखकर दीपदान किया जाएगा। कालिका माता व महाराणा प्रताप की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए जाएगे। बाद में भव्य अतिशबाजी कर सभी का मुंहमीठा कराया जाएगा। इस मौके पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे।

 



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