मानवेन्द्र सिंह राठौड़/उदयपुर . महंगाई में अक्सर रुलाने वाले प्याज के भावों में अभी नरमी है, लेकिन लहसुन ने त्योंरी चढ़ा ली है। गत तीन वर्षोंं बाद लहसुन के भावों में जबरदस्त उछाल आया है और कीमतें आसमान छूने लगी है।
यहां से होती है आवक
सवीना मंडी में थोक व्यापारी उमेश तलरेजा ने बताया कि उदयपुर में मध्यप्रदेश के रतलाम, मंदसौर, नीमच, सैलाना, खंडवा सहित कई हिस्सों से लहसुन की आवक होती है। इसके अलावा प्रतापगढ़, बड़ीसादड़ी, भीण्डऱ कोटा, झालावाड़, बूंदी से भी कम तादाद में लहसुन की आवक हो रही है।
इसलिए बनी है यह स्थिति
मध्यप्रदेश में किसानों की ओर से कम खेती करने और कम पैदावार से यह स्थिति बनी है। तलरेजा ने बताया कि प्रतिवर्ष लहसुन एक हजार से 2 हजार रुपए प्रति क्वि. से बिकता था। इस बार कम पैदावार से भाव 3 से 8 हजार रुपए प्रति क्वि. है। अगले एक माह में सफेद लहसुन का भाव 100 रुपए पार होने की संभावना है। इसके अलावा प्याज में भी अन्य वर्षों की तुलना में दो-तीन रुपए महंगा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
मालवा में किसानों ने फेरा मुंह
लहसुन के भाव में आई यह तेजी मालवा में किसानों की ओर से लहसुन की खेती से मुंह फेर लेने से आई है। दरअसल तीन वर्षोंं में लहसुन की बंपर पैदावार होने से किसानों को वाजिब दाम नहीं मिल पाया और उन्हें फ सल को कौडिय़ों के भाव बेचना पड़ा। दो बार नुकसान उठाने के बाद मध्यप्रदेश के किसानों ने इस वर्ष लहसुन की खेती से दूरी बना ली।
कम बुवाई से आवक धीमी
इस बार मध्यप्रदेश में लहसुन की कम बुवाई होने से उदयपुर की सब्जी मंडी में आवक भी धीमी है। नई लहसुन के रोजाना मंड़ी में 500- से 400 कट्टे ही आ रहे हैं, जबकि पूर्व में एक हजार कट्टे आते थे। मालवा में कम पैदावार होने से लहसुन के भावों में गत वर्षों के मुकाबले 4 से 5 गुना इजाफा हुआ है। पिछले लंबे समय से 25 से 40 रुपए प्रति किग्रा बिक रहा लहसुन इन दिनों बाजार में 70 से 100 रुपए प्रति किग्रा बिक रहा है, जबकि फु टकर में 80 से 100 रुपए प्रति किग्रा की दर से लोग खरीद रहे हैं।





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