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बदला एमजीएच का रूप: मरीजों का होने लगा पूरा इलाज, अब है बहुत कुछ बाकी

भीलवाड़ा।

 

वर्षों से चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे महात्मा गांधी चिकित्सालय का मेडिकल कॉलेज से जुडऩे के बाद रूप बदल गया है। मेडिकल कॉलेज के ४७ चिकित्सक मिलने के बाद अब कुल 112 चिकित्सक हो गए हैं। इससे मरीजों को काफी राहत मिली है। नर्सिंगकर्मियों की संख्या भी 77 से बढ़कर 162 हो गई। एक साल पहले आउटडोर में मरीजों को चिकित्सक मुश्किल था। अब मरीजों को बराबर सेवाएं मिलने लगी है। अस्पताल के वार्डों में भी कुल 500 बेड हो गए है। वार्डों में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक भी सेवाएं रहे हैं। पहले चिकित्सकों का समय वार्ड में ही पूरा हो जाता था। अब इनके आउटडोर में भी बैठने से रोगियों को काफी राहत मिली है। यहां चिकित्सक जटिल ऑपरेशन भी करने लगे हैं। हड्डियों के सभी तरह के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। रोगियों के लिए सर्जिकल आइसीयू, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड भी चालू है।

 

अब भी कई विभागों के विशेषज्ञों की है दरकार

अस्पताल में अब भी कुछ कमियां हैं। जैसे अस्पताल में कैंसर रोगियों को परामर्श देने के लिए एनकॉलोजिस्ट नहीं है। न्यूरोलोजिस्ट, रेडियोलोजिस्ट, नेफ्रोलोजिस्ट, कॉर्डियोलोजिस्ट, गेस्ट्रोलोजिस्ट, एंडोक्राइनोलोजिस्ट नहीं होने से मरीजों को परेशानी होती है। मेडिकल कॉलेज का दूसरा सत्र शुरू होने के बाद इन चिकित्सकों के आने की भी संभावना है। फिलहाल ऑबर्जवेशन वार्ड भी नहीं है।

 

गर्भवती महिलाओं को विशेष राहत

मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में एक साल पहले गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए परेशान होना पड़ता था। समय पर चिकित्सक नहीं मिलते थे७ अब मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के आने के बाद समय पर चिकित्सा परामर्श मिल पा रहा है। आउटडोर में तीन से चार चिकित्सक बैठते हैं।

 

कतारों से मिलने लगी मुक्ति


अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या बढऩे के साथ ही आउटडोर में मेडिकल व सर्जरी विभाग के बाहर मरीजों को अब लम्बी कतारों से मुक्ति मिलने लगी है।

 

टेलीमेडिसीन से मिल रही विशेषज्ञों की सेवाएं

 

यहां आने वाले मरीजों को अगर सुपर स्पेश्यालिटी चिकित्सकों की सेवाओं की आवश्यकता हो तो उन्हें जयपुर, उदयपुर व अहमदाबाद जाने की जरूरत नहीं है। अस्पताल में ही चिकित्सक टेलीमेडिसीन के जरिए जयपुर स्थित सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेश्यालिटी चिकित्सकों की सेवाएं मिल रही है। मरीज टेलीमेडिसीन के जरिए सीधे चिकित्सक से बात कर परामर्श ले रहा है।

 

महंगी जांचें हो रही नि:शुल्क


अस्पताल में मुख्यमंत्री नि:शुल्क योजना के अलावा कई महंगी जांचें बाहर करानी पड़ती थी। अब ये जांचें आधार कार्ड देखकर अस्पताल में ही नि:शुल्क की जा रही है। थॉयराइड, डेंगू, हिमोफिलिया समेत करीब 36 प्रकार की जांचें की जा रही हैं। एमआरआइ, डायलिसिस व सीटीस्केन जांच पीपीपी मोड पर हो रही है। इको, ईईजी, टीएमटी, ईसीजी, होल्टर आदि जांचें भी हो रही है। लैब में माइक्रोबॉयलोजी, पैथोलोजी, बायोकेमेस्ट्री की आधुनिक मशीनें आ गई हैं।

 

कैंसर रोगियों को राहत

 

अस्पताल में कैंसर रोगियों को डॉ. कल्पना श्रीवास्तव द्वारा कीमोथेरैपी दी जा रही है। मरीजों को दवा भी नि:शुल्क मिल रही है। हालांंकि परामर्श के लिए जयपुर जाना पड़ रहा है, लेकिन फॉलो यहां के चिकित्सक कर रहे हैं।

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विभाग व चिकित्सक

 

मेडिकल विभाग: 15 चिकित्सक

डॉ. अरुण गौड़ (सह आचार्य ), डॉ. अंजु कोचर (सह आचार्य ), डॉ. दौलत मीणा (सहायक आचार्य ), डॉ. मनीष सिंघल (सहायक आचार्य), डॉ. रामावतार बैरवा (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. जीवराज ढाका (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. सुरेश गजराज (सीनियर रेजिडेंट) एवं 8 अन्य जूनियर रेजिडेंट।

 

आर्थोपेडिक विभाग: 4 चिकित्सक

डॉ. गौरव देशवाल (सहायक आचार्य), डॉ. राजेन्द्र लोढ़ा (जूनियर रेजिडेंट), डॉ. कपिल शर्मा (जूनियर रेजिडेंट), डॉ. बलराम चोपड़ा (जूनियर रेजिडेंट)।

 

सर्जिकल विभाग: 15 चिकित्सक

डॉ. एचएस सहवाल (सह आचार्य ), डॉ. पवन बंसल (सह आचार्य ), डॉ. विनोद जीनगर (सह आचार्य ), डॉ. रीटा वर्मा (सहायक आचार्य), डॉ. आनंद अग्रवाल (सहायक आचार्य), डॉ. अंशु कपूर (सीनियर रेजिडंेट), डॉ. सुरेश तिवाड़ी (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. पंकज सोमाणी (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. उत्तमप्रकाश दरगड़ एवं अन्य ६ जूनियर रेजिडेंट।


नेत्र विभाग: 2 चिकित्सक

डॉ. रजनी गौड़ (सह आचार्य), डॉ. रमाकांत सेठी (सीनियर रेजिडेंट)।


शिशु रोग विभाग : 7 चिकित्सक

डॉ. आरएस क्षोत्रिय (सह आचार्य), डॉ. सरिता काबरा (सह आचार्य), डॉ. कुलदीप सिंह (सह आचार्य) एवं अन्य दो सिनियर व दो जूनियर रेजिडेंट।


ईएनटी विभाग: 2 चिकित्सक

डॉ. ओमप्रकाश शर्मा (कनिष्ठ विशेषज्ञ), डॉ. जयराज वैष्णव सहायक आचार्य


मानसिक रोग विभाग: २ चिकित्सक

डॉ. एसपी आगीवाल (आचार्य ), डॉ. वीरभान चंचलानी (सहायक आचार्य )

 


चर्म रोग विभाग: 2 चिकित्सक

डॉ. महेन्द्र छापरवाल सहायक आचार्य, डॉ. भागीरथ (सहायक आचार्य)


दंत रोग विभाग: 3 चिकित्सक

डॉ. राकेश गर्ग (सहायक आचार्य), डॉ. एमएल जाटव (कनिष्ठ विशेषज्ञ), डॉ. रोहित बसेर (जूनियर रेजिडेंट)


गायनिक विभाग: 8 चिकित्सक

डॉ. सुशीला राठी (प्रोफेसर), डॉ. ममता गंगवाल (सहायक आचार्य), डॉ. मनीषा बहड़ (सहायक आचार्य), डॉ. नवीन भडाणा (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. मुकेश सुवालका (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. सपना आसेरी (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. रश्मि शर्मा (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. विनिता गुरावा (सीनियर रेजिडेंट) एवं अन्य।


एनेस्थिसिया विभाग: 7 चिकित्सक

डॉ. राजन नंदा (प्रोफेसर), डॉ. रमेश माहेश्वरी (सहआचार्य), डॉ. अलका भार्गव (सहआचार्य), डॉ. राजेन्द्र वर्मा (सहायक आचार्य), डॉ. सीमा पीपल (सहायक आचार्य), डॉ. आशीष नारोलिया (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. अमृतांश पांडे।


सोनोग्राफी विभाग: 4 चिकित्सक

डॉ. राजेन्द्र सोमनी, डॉ. सीपी शर्मा, डॉ. विजय माहेश्वरी, डॉ. अमूल पारीक


लैब व ब्लड बैंक: 2 चिकित्सक

डॉ. अनिल लढ़ा (पैथोलोजिस्ट), डॉ. दीपक गोयल (पैथोलोजिस्ट)


डायलिसिस: 1 चिकित्सक

डॉ. देवकिशन सरगरा।



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