शिव. आमजन तक पानी पहुंचाने के लिए क्षेत्र में संसाधन को पर्याप्त हैं, लेकिन इनका संचालन करने वाले नहीं है। ऐसे में सुदूर गांवों में बैठे लोग इन संसाधनों को सिर्फ देख ही सकते हैं। वहीं पानी के अभाव में आवारा पशु मर रहे हैं तो ग्रामीणों को भी लम्बा सफर या महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है। अकाल के चलते बेरियां, टांके सहित अन्य परम्परागत जलस्रोत सूख गए हैं।
यह है स्थिति
शिव क्षेत्र में पंप रूम शिव, गूंगा, राजडाल, झांफली, मतुजा, निंबला है। इसके अलावा क्षेत्र में 58 नलकूप, 5 ओपनवेल, 2 बूस्टर, 3 पंप ड्राइवर तथा 16 सिंगल फेस नलकूप हैं। लम्बी पाइप लाइनों के जरीए इनसे सैकड़ों गांव व ढाणियां भी जुड़ी हुई हैं। अब कार्मिकों के अभाव में लाइनों की सारसंभाल नहीं हो पा रही है। ऐसे में अधिकतर लाइनें क्षतिग्रस्त व चौक हो गई हैं। इससे ग्रामीणों के लिए सभी संसाधन होने के बावजूद नहीं के बराबर हैं।
यहां ये पद रिक्त
उपखंड मुख्यालय पर कनिष्ठ अभियंता का एक पद, निंबला में एक कनिष्ठ अभियंता, भिंयाड में एक सहायक अभियंता व कनिष्ठ अभियंता, उंडू में एक सहायक अभियंता व कनिष्ठ अभियंता का पद रिक्त है।
1990 के बाद भर्ती नहीं, समाप्त कर रहे पद
विभागीय नियम के अनुरूप 8 किलोमीटर पाइप लाइन पर एक कार्मिक की आवश्यकता होती है। ऐसे में विभाग की बिछी पाइप लाइन के अनुरूप 250 से 300 कार्मिकों की आवश्यकता है, लेकिन यहां मात्र 100 के करीबन कार्मिक ही कार्य कर रहे हैं। 1990 के बाद विभाग की ओर से हेलपर्स की भर्ती नहीं की जा रही है, वहीं सेवानिवृत्ति के बाद उनके पद समाप्त किए जा रहे हैं।
नहीं मिल रहा वाहन
विस्तृत भू-भाग में क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों व विभाग के स्रोतों की नियमित जांच के लिए अधिकारियों को वाहन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। विभाग की ओर से एक माह में 20 हजार रुपए तक के वाहन चलाने की स्वीकृति है। यह मात्र 10 दिन में ही पूरी हो जाती है।
स्रोत बढ़ रहे कार्मिक नहीं
विभाग में रिक्त पदों की गंभीर समस्या है। लगातार जलदाय विभाग के स्रोत तो बढ़ रहे हैं, लेकिन उसके मुताबिक कार्मिक नहीं होने से क्षतिग्रस्त लाइनों को दुरुस्त करवाने में समस्या आ रही है। साथ ही लिफ्ट परियोजना से भी पर्याप्त पानी नहीं मिलने से जलापूर्ति में समस्या हो रही है।
- जयरामदास मेघवाल, सहायक अभियंता, शिव





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