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बिना हैलमेट के वाहन चलाने में समझते हैं शान

प्रतापगढ़. जिला मुख्यालय पर बाइक व स्कूटी चालक बिना हेलमेट चलना अपनी शान समझते हैं। पुलिस के दबाव से कुछ लोग हेलमेट लगाते हैं, लेकिन वह काम चलाऊ होता है। शहर में अब भी लोग हेलमेट की उपयागिता को नहीं समझ रहे हैं। जबकि परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार सडक़ दुर्घटना में घायल व मृतकों में करीब 40 फीसदी बिना हेलमेट होते है। कई फीसदी वाहन चालकों ऐसे होते हैं, जिन्होने सस्ते हेलमेट लगाए होते है। सडक़ दुर्घटना में जितने लोग घायल हुए है या जिनकी जिंदगी सडक़ों के हवाले हो गई है, जिन्होंने या तो हेलमेट नहीं पहना था या फिर बहुत घटिया स्तर का हेलमेट पहना था। जिला मुख्यालय पर इन दिनों हेलमेट का चलन दिखाई दे रहा है। लेकिन इन में से अधिकांश हेलमेट घटिया क्वालिटी के है। शहर में भी सडक़ किनारे कई घटिया क्वालिटी के हेलमेट बेचते हुए दिखाई देते है। लोग भी हेलमेट अपनी सुरक्षा को देखते हुए नहीं बल्कि पुलिस से बचने के लिए सस्ते हेलमेट खरीद रहे है।
बाजारों में बिक रहे घटिया हेलमेट
शहर के सडक़ों पर नकली आईएसआई मार्क वाले और घटिया हेलमेट धड़ल्ले से बिक रहे है। पुलिस को इस बात की ज्यादा चिंता नहीं है कि कौनसे बाइक सवार ने असली पहना या नकली हेलमेट, बस सिर पर हेलमेट लगा दिखना चाहिए। लोगों की जान से ज्यादा पुलिस चालान पर जोर देती रही है। पुलिस और परिवहन विभाग के जिम्मेदार न तो घटिया हेलमेट की बिक्री करने वालों पर रोक लगा रहे है और न ही उन पर कोई कार्रवाई कर रही है। पुलिस हेलमेट नहंी पहनने वालों के खिलाफ कार्रवाई तो कर रही है लेकिन वह इस पहलू को नजर अंदाज कर रही है कि हेलमेट आईएसआई मार्का या नहीं।
यह फायदा है आईएसआई मार्काहेलमेट का
आइएसआइ मार्का हेलमेट के अंदर की ओर थर्माकोल और बाहर की ओर स्टील लगी होती है, जो चोटों से बचाता है। इसमें आगे की ओर लगा मजबूत माउथ गार्ड चेहरे की हिफाजत करता है। इनकी कीमत 700 से 1500 रूपए तक हो सकती हे। इनकी बाकायदा रसीद और गारंटी भी मिलती है। वहीं सस्ता हेलमेट 150 से 250 रूपए तक सस्ते दाम पर मिल जाते है। इन हेलमेट पर किसी कंपनी का नाम नहीं होता है।



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