करौली. लोकसभा चुनाव में वाहनों की व्यवस्था की खातिर परिवहन अधिकारियों को काफी भाग-दौड़ करनी पड़ रही है। वाहन मालिक भी उनको खूब छका रहे हैं। वाहनों के अधिग्रहण कर लेने के बावजूद भी वाहनों की धर-पकड़ करने में परिवहन अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। परिवहन निरीक्षक वाहनों को ढूंढते फिर रहे हैं और अब सख्ती भी अपनाई जा रही है।
मंगलवार को सुबह जिला मुख्यालय पर मुख्य सड़कों से लेकर निजी बस स्टेण्ड तक परिवहन अधिकारी बसों को ढूंढते नजर आए। इसमें उन्हें सफलता भी मिली । कई बसों को सुबह ही परिवहन निरीक्षक अपनी निगरानी में पुलिस लाइन तक पहुंचाकर आए।
गौरतलब है कि परिवहन विभाग ने अधिग्रहित किए गए 217 वाहनों को 29 अप्रेल तक पुलिस लाइन करौली में बुलाया था, लेकिन निर्धारित तिथि तक महज 109 वाहन ही पहुंचे। आधे से भी अधिक वाहन मालिकों ने अपने वाहन ही नहीं भेजे। यह देख परिवहन अधिकारियों का माथा ठनक गया और पंजीयन निलम्बन की चेतावनी भी दे डाली, लेकिन दूसरे दिन तक वाहन मालिकों पर कोई खास असर नहीं हुआ।
दूसरे दिन की भाग दौड़
परिवहन विभाग के अधिकारियों की भाग-दौड़ के बाद मंगलवार को विभाग को कुछ सफलता तो मिली, लेकिन अभी भी वाहनों की दरकार है। परिवहन सूत्रों के अनुसार मंगलवार को 18 और बसें आईं, जबकि 21 बसें सोमवार को पहुंच गई थी। इस पर 71 में से अभी 39 ही बसें मिली है। इसी प्रकार मीडियम वाहनों में अब 71 में से 50 मिल गए हैं, जबकि 21 की अभी जरुरत है। पिकअप में ज्यादा सफलता नहीं मिली और अभी 50 की जरुरत में से करीब 30 पिकअप परिवहन विभाग को मिल सकी हैं।
गायब हुईं बस
इन दिनों शादी-विवाह की अधिकता के चलते बस मालिकों ने बारातों के लिए बसों की बुकिंग की हुई है, ऐसे में वाहन मालिक चुनाव में वाहनों को देने में कतरा रहे हैं। अनेक वाहन मालिकों ने वाहनों को इधर-उधर कर दिया है, जबकि परिवहन निरीक्षकों को जो वाहन मिल रहे हैं, उनका अधिग्रहण किया जा रहा है।
करेंगे निलम्बन की कार्रवाई
चुनाव में अधिग्रहित किए गए वाहनों को उपलब्ध नहीं कराने पर करीब 50 बस मालिकों को नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई है। वाहन उपलब्ध नहीं कराने पर पंजीयन निलम्बन की कार्रवाई की जाएगी।
योगेश शर्मा, जिला परिवहन अधिकारी, करौली





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