सीकर.
सीकर शहर के लोग आग से बचाव के लिए दमकल पर निर्भर नहीं रहें। अग्नि हादसा होने पर कभी भी दमकल की सांस फूल सकती है। बहुमंजिला भवन निर्माण की अनदेखी करने वाली परिषद ने शहर के विस्तार के साथ अपने संसाधनों का भी विस्तार नहीं किया है।
स्थिति यह है कि 15 से 25 वर्ष पुरानी दमकल की गाडिय़ों से आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। सूरत के अग्नि हादसे के बाद पत्रिका ने इस पर नजर डाली तो यह स्थिति सामने आई। शहर में नगर परिषद ने पिछले 15 वर्ष में दकमल की एक भी बड़ी गाड़ी की खरीद नहीं की। हां, कम क्षमता की छोटी गाडिय़ां जरूर खरीदी गई हैं।
शहर को चाहिए चार फायर स्टेशन और 20 गाडिय़ां
शहर में आबादी के विस्तार को देखते हुए चार फायर स्टेशन होने चाहिए। वर्तमान में शहर में दो फायर स्टेशन है। इनमें से सालासर रोड पर नेहरू पार्क के पास और दूसरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। शिक्षा के क्षेत्र में सर्वाधिक विकास पिपराली और नवलगढ़ रोड पर हुआ है। इस क्षेत्र में तीन सौ के लगभग शिक्षण संस्थान और छात्रावास होने के बावजूद आज तक फायर स्टेशन की योजना नहीं बनाई गई। ऐसे में इस क्षेत्र में अग्नि हादसा होने पर दमकल को पूरे शहर से गुजरना पड़ेगा। जाम पर आग धधकने के बाद ही दमकल पहुंच पाएगी।
क्या कहता है नियम
सेवानिवृत चीफ अग्नि शमन अधिकारी ईश्वर सिंह भाकर का कहना है कि नियमानुसार 50 हजार की आबादी पर दमकल की एक गाड़ी होनी चाहिए। शहर के आसपास के गांवों में भी शहर से ही दमकल को भेजना होता है। ऐसे में यहां पर चार फायर स्टेशनों पर दमकल की 20 बड़ी गाडिय़ां होने चाहिए। पिपराली और नवलगढ़ रोड पर अलग से फायर स्टेशन बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा शहर के जाट बाजार क्षेत्र में भी दमकल की गाड़ी खड़ी रखनी चाहिए, जिससे भीतरी शहर में आग लगने की स्थिति में दकमल तत्काल पहुंच सके।
बेड़े में मात्र तीन बड़ी गाडिय़ां
नगर परिषद के पास 14 हजार लीटर क्षमता की दमकल की दो बड़ी टर्बो गाडिय़ां है। दोनों ही करीब 15 वर्ष पुरानी है। तीसरी बड़ी दमकल 25 वर्ष पुरानी बताई जा रही है। परिषद के अधिकारी जुगाड़ के सहारे इनसे काम चला रहे है। सूत्रों के अनुसार परिषद के पास कुल सात गाडिय़ां है। नई खरीदी गई चार गाडिय़ों की क्षमता बहुत कम है।
हाइड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं, सिर्फ जुगाड़
नगर परिषद की अग्निशमन की वर्तमान व्यवस्था बहुमंजिला इमारतों में लगी आग पर काबू नहीं पा सकती। अब तक जुगाड़ के सहारे किया जा रहा प्रयास कभी भी बड़ी आफत बन सकता है। इसके लिए नगर परिषद को 30 मीटर का हाइड्रोलिक प्लेटफार्म खरीदना होगा। सीकर में नगर परिषद ने करीब सात वर्ष पहले इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन यह प्रस्ताव अभी तक कागजों में ही दबा हुआ है।





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