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जिस तेल ने दिलाई थी सत्ता अब वही बना सिरदर्द, सरकार ने निकाला ये रास्ता

नई दिल्ली। देश में लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। चार चरणों का मतदान हो चुका है, बचे हुए तीन चरणों के लिए सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक ने एड़ी-चोटी की जोर लगा दी है। लेकिन, बीच चुनाव अमेरिका के कारण अचानक भारत में अलग 'तूफान' मचने वाला है। अमेरिका के द्वारा ईरान से कच्चे तेल की खरीद पर लगी पाबंदी का समय गुरुवार को खत्म हो रहा है। जिसके बाद चर्चा यह शुरू हो गई है कि अचानक पेट्रोल-डीजल (Petrol-diesel) के दामों में करीब तीन से चार रुपए की बढोतरी हो सकती है। अगर बीच चुनाव पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा होता है, तो इसका असर बचे हुए चरणों पर सीधा पड़ सकता है। क्योंकि, 2014 में भाजपा ने पेट्रोल-डीजल के मुद्दे को जमकर भुनाया था और पार्टी को इसका लाभ भी मिला था। पेट्रोल औ? डीजल ल चुनावी मैदान में 'आग' न लगाए इसके लिए सरकार ने समय रहते पूरी तैयारी कर ली है।

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narendra taneja

क्या है सरकार की तैयारी?

भाजपा प्रवक्ता और एनर्जी एक्सपर्ट नरेन्द्र तनेजा ने पत्रिका डॉट कॉम से बात करते हुए बताया कि चुनाव के दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बढोतरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि देश में तेल आपूर्ति में कोई कमी नहीं आए, इसके लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। हालांकि साथ में ये भी बता दिया की देश की जनता को चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के तैयार रहना होगा। वो भी एक दो रुपए नहीं बल्कि 3 से 4 रुपए प्रति लीटर।

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5 देशों से अनुबंध होगा कितना कारगर

नरेन्द्र तनेजा ने बताया कि जब अमेरिका ने इरान पर प्रतिबंध लगाया उसी समय से सरकार ने तेल आयात के लिए दूसरे देशों से बातचीत शुरू कर दी थी। तनेजा का कहना है कि भारत इरान से कुल नौ फीसदी क्रूड ऑयल का आयात करता था। लेकिन, प्रतिबंध लगने के बाद भारत केवल साढ़े चार फीसदी ही क्रूड ऑयल आयात कर रहा था। उन्होंने कहा कि समय रहते भारत ने पांच देशों से अनुबंध किया है। इनमें सऊदी अरब, कुबैत, नाइजीरिया , इराक और अमरिका जैसे देश शामिल हैं। अब देखना है कि इन 5 देशों के साथ किया गया अनुबंध कितना कारगर साबित हो सकता है।

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अमेरिका से 84000 करोड़ का अनुबंध

भारत के ईरान के विकल्प तलाशने शुरु कर दिए हैं। इसी कड़ी में अमेरिका से भारत ने 84000 करोड़ के कच्चे तेल का अनुबंध किया है। लेकिन क्या ये काफी होगा, क्योंकि भारत के अलावा ईरान पूरे दुनिया को 15 लाख बैरल कच्चे तेल की सप्लाई करता है। और अब अमेरिका के प्रतिबंध के बाद बाकी बचे देशों के लिए अमेरिका पर निर्भरता होगी।



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