- विभाग एवं जनप्रतिनिधि नहीं कर रहे सुनवाई
गंगापुरसिटी . गर्मी का मौसम शबाब पर आते ही चहुंओर पेयजल संकट गहराने लगा है। वजीरपुर में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते नजर आ रहे हैं। सूखे कंठ लेकर लोग अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों से फरियाद कर रहे हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ भी हासिल नहीं हो रहा। आलम यह है कि कई वार्डों में लोग दूषित पानी पीने को विवश हैं। पानी के टैंकरों की व्यवस्था नहीं होने से लोग इधर-उधर से पेयजल का जुगाड़ कर रहे हैं।
क्षेत्र में इस बार कम हुई बारिश के कारण जलस्रोतों का पानी सूख गया है। जलस्रोतों के रीतने और जरूरत से ज्यादा दोहन होने के कारण कस्बे में पेयजल समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। गर्मी के साथ यह समस्या और बढऩे की आशंका है। लोगों का कहना है कि पेयजल समस्या से राहत दिलाने के लिए टैंकरों से आपूर्ति करनी होगी। लोगों ने कहा कि इस संबंध में कई बार जनप्रतिनिधि एवं जलदाय विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
कस्बे के अन्य हिस्सों के साथ वार्ड तीन एवं चार में पेयजल की खासी किल्लत बनी हुई है। छीपियों के मोहल्ले में आधे वार्ड में ही पेयजल सप्लाई हो रही है। लोगों का आरोप है कि विभाग सभी से बिल के पूरे पैसे वसूल रहा है। लोगों ने बताया कि कस्बे में पानी के लिए बनाई गई टंकियां सूखी पड़ी हैं। एक टंकी पिछले दो साल से सूखी है। छीपियों का मोहल्ला निवासी गोपाल प्रसाद छीपी, जौहरीलाल छीपी, निखिल कुमार, अशोक कुमार, लक्ष्मीनारायण, नरेश कुमार, रामभरोसी एवं शांति देवी आदि ने बताया कि मोहल्ले में पिछले डेढ़ साल से यह पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन समाधान नहीं हो रहा। कस्बे की रहीस कॉलोनी में टंकी काफी दिनों से सूखी पड़ी है।
वार्ड नंबर 12 के मोहम्मद अकरम का कहना है लोग पीने के पानी के लिए भटक रहे हैं। महिलाओं को एक किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। वहीं वार्ड नंबर 10 के बत्तीलाल जाटव ने कहा कि कई सालों से कस्बे में पेयजल समस्या है। सामाजिक कार्यों के लिए महंगे दामों पर टैंकर मंगाना मजबूरी हो गया है।
माह में दो बार ही सप्लाई
लोगों का आरोप है कि जलदाय विभाग की ओर से कस्बे में नाममात्र की पेयजल सप्लाई की जा रही है। कई वार्डों में चार-पांच दिन में तो कई वार्डों में माह में सिर्फ दो बार ही सप्लाई दी जा रही है। इससे लोग बूंद-बूंद पानी को तरसते देखे जा रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि वह करीब एक किमी दूर से पानी लाती हैं। कुओं का पानी सूख चुका है। हैण्डपंपों में पानी नहीं बचा है। ऐसे में हैण्डपंप शोपीस बनकर रह गए हैं। लोगों को निजी बोरवैलों से पानी लाकर काम चलाना पड़ रहा है। समस्या से परेशान लोग पहले जाम भी लगा चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है।
15 मिनट आता है पानी
लोगों का कहना है कि पानी आपूर्ति के लिए जलदाय विभाग की ओर से नल कनेक्शन किए हुए हैं, लेकिन आपूर्ति चार या पांच दिन में महज एक बार होती है। वह भी अधिकतम 15 मिनट के लिए। लोगों का आरोप है कि इस आपूर्ति में भी लोगों को दूषित पानी मिलता है। नलों के आने का समय भी निर्धारित नहीं है। आपूर्ति के समय नल पर महिलाओं की भीड़ लग जाती है। सुबह सप्लाई के समय लोग घरों से दौड़-दौडक़र आवाज लगाते हुए बाहर आते नजर आते हैं।
तो कैसे खरीदें पानी
लोगों ने बताया कि संपन्न परिवार तो पैसे से टैंकर मंगाकर अपनी जरूरत पूरी कर लेते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि कस्बे में व्याप्त पेयजल संकट के चलते टैंकर का पानी भी महंगा हो गया है। ऐसे में लोगों को दाम चुकाने में दिक्कत होती है। लोगों ने विभाग से नियमित आपूर्ति कराकर लोगों की पेयजल संबंधी जरूरत पूरी करने की मांग की है।
यह बोले लोग
वजीरपुर कस्बे में पानी की काफी समस्या है। पानी की समस्या को लेकर उच्चाधिकारियों से बात करते हैं तो वह कोई संतोषजवाब नहीं देते। ऐसा ना हो कि जल समस्या बड़े आंदोलन का रूप ले ले। जलदाय विभाग से शीघ्र समस्या के समाधान की मांग की है।
- ओमप्रकाश गोयल, कस्बावासी
कस्बे के दर्जनों वार्डों में पानी की किल्लत है। अभी गर्मी का सीजन शुरू हुआ है। जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो लोग आंदोलन को मजबूर होंगे।
- जुल्फिकार अली भुट्टो, कस्बावासी
कस्बे के वार्ड नंबर 6 में टंकी की मोटर खराब होने से पिछले 2 दिनों से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। आसपास पानी का कोई स्रोत नहीं होने से वार्डवासियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कहने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही।
- अशोक शर्मा, कस्बावासी
हैंण्डपंप पिछले 1 साल से खराब पड़ा हुआ है, लेकिन विभाग के अधिकारियों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जलस्रोत सूखने के कारण हैण्डपंपों में पानी भी नहीं बचा है। ऐसे में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
- नंदराम बैरवा, बड़ौली का पुरा






No comments:
Post a Comment