बाड़मेर। प्रदेश की जिन गिनी-चुनी सीटों पर कांग्रेस का भरोसा था उसमें बाड़मेर-जैसलमेर (Barmer-Jaisalmer Constituency Election Results 2019) एक थी। राहुल गांधी से व्यक्तिगत संबंध के चलते भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए मानवेन्द्र सिंह (Manvendra Singh) को वादे के मुताबिक बाड़मेर संसदीय सीट से टिकट भी दिया गया। भाजपा ने सांसद कर्नल सोनाराम को टिकट काटकर कैलाश चौधरी (Kailash Choudhary) को उतारा। भाजपा के लिए कैलाश ने न केवल जीत दर्ज करवाई बल्कि नया इतिहास रच दिया और आज तक की सबसे बड़ी जीत भाजपा के खाते में आई।
ऐसे डाली जीत की नींव
भाजपा के लिए सबसे बड़ी मशक्कत थी टिकट देना। तीन-चार लोगों में मौजूदा सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी की कड़ी दावेदारी के बीच बायतु से विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे कैलाश ने खुद को सांसद चुनाव के लिए तैयार कर रणनीति शुरू की। जातिगत आधार के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि उनका मजबूत आधार था। कैलाश यहां कामयाब हुए।
टिकट के बाद पर्चा दाखिल करते वक्त उनकी पहली सभा आशानुरूप नहीं थी, हालांकि इसमें केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर आए थे और स्थानीय कई नेता नहीं आए। यहां से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सक्रिय हुआ और प्रधानमंत्री की बड़ी सभा की तैयारियां शुरू। प्रधानमंत्री की सभा ने भाजपा के प्रचार-प्रसार में प्राण फूंक दिए। प्रधानमंत्री खुलकर बोले और रंग जमा गए।
माहौल जमने लगा तो दूसरे स्टार प्रचार सन्नी देओल का रोड शो प्रचार के अंतिम दिन हुआ और शहर की सड़कें जाम हो गईं। माहौल के इस रंग के बीच मोदी लहर का सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफार्म पर पूरा फायदा उठाने के साथ प्रत्येक बूथ को मजबूत किया गया। 73 प्रतिशत से अधिक मतदान ने भाजपा का पक्ष मजबूत होने का पहला संकेत दिया जो जीत में बदला।
भाजपा जीत के प्रमुख कारण
1. भाजपा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद का चेहरा चुना,संघ की कैंपेेनिंग।
2. मोदी लहर, प्रधानमंत्री की रैली और सन्नी देओल के रोड शो से माहौल बना।
3. राजनीतिक क्षेत्र में निर्वविवाद एवं युवा चेहरा।
4.किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष व बायतु विधायक रहने का अनुभव।
5. बाड़मेर सहित बालोतरा-सिवाना क्षेत्र में अच्छी पकड़ का फायदा।
कांग्रेस की हार के प्रमुख कारण
1. कांग्रेस की कैंपेनिंग रही कमजोर, मुख्यमंत्री के अलावा कोई बड़ी रैली भी नहीं।
2. मानवेन्द्रसिंह कांग्रेस के लिए नया चेहरा, कार्यकर्ताओं तक सीधी पहुंच नहीं।
3. मोदी लहर के चलते करारी शिकस्त।
4. जातिगत गणित में एक बड़ा तबका रहा मानवेन्द्र के खिलाफ, खुद के लोगों की भितरघात।
5. सातों विधायक रहे बेअसर, जीते विधायक भी नहीं ला सके वोट।





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