पीएनसी वार्ड में ब्लड चढ़ाने में आनकानी
----- फाइल पर नोट्स डलवाने के नाम पर परिजनों से कटवाए जा रहे चक्कर
प्रकरण:01
एक डीबीएन निवासी सरिता पत्नी मिन्टू चार दिन से राजकीय चिकित्सालय में भर्ती है। परिजन ने बड़ी मुश्किल से ब्लड की व्यवस्था की। ब्लड चढ़ाने के बजाए उन्हें इधर-उधर दौड़ाया जा रहा है।
प्रकरण: 02
रामपुरा निवासी अंजू पत्नी रविंद्र कई दिन से पीएनसी वार्ड में भर्ती है। उसे तीन बार खून चढ़ाया जा चुका है। मंगलवार को मुश्किल से रक्तदाता की व्यवस्था की लेकिन अब डॉक्टर के नोटस के नाम पर उलझाया जा रहा है।
पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट
---प्लस फोटो--
श्रीगंगानगर. राजकीय जिला चिकित्सालय के गायनिक वार्ड में भर्ती महिलाओं को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिलती तो कभी खून चढ़ाने की दिक्कत आती है। अब रोगियों के परिजनों को खून चढ़ाने से पहले नोट्स डलवाने के नाम पर चक्कर कटवाए जा रहे हैं।
पीएनसी वार्ड में मंगलवार दोपहर पौने एक बजे की घटना है। यहां भर्ती दो महिलाओं के परिजन चिकित्सालय के ब्लड बैंक से एक-एक यूनिट ब्लड जारी करवाकर लाए। वे ब्लड लेकर वार्ड पहुंचे तो नर्सिंग स्टाफ ने रोगी की फाइल पर डॉक्टर के नोट्स डलवाने के लिए आपातकालीन कक्ष भेज दिया। अब परिजन पीएनसी वार्ड से आपातकालीन कक्ष पहुंचे। यहां डयूटी कर रहे डॉक्टर ने नोट्स डालने से इनकार कर दिया। डॉक्टर का तर्क था कि जिस चिकित्सक ने ब्लड स्लिप बनाई थी, नोट्स भी वही डालेंगे। परेशान परिजन वापस पीएनसी वार्ड पहुंचे। लेकिन, बिना डॉक्टर के नोट्स के नर्सिंग स्टाफ ने खून चढ़ाने से इनकार कर दिया।
लगाई गुहार
अंजू की मां किरण नर्सिंग स्टाफ से सवाल करती है कि ‘मैडमजी बड़ी मुश्किल से रक्तदाता की व्यवस्था हो पाई है। अब खून खराब हो गया तो रक्तदाता की व्यववस्था करना मुश्किल हो जाएगा। यही स्थिति सरिता के परिजनों की है।
डॉक्टर ने किया इनकार
मिन्टू का कहना है कि आपातकालीन कक्ष के डॉक्टर ने नोट्स डालने से मना कर दिया। डॉक्टर ने नर्सिंग स्टाफ से बात करने के लिए कहा है। नर्सिंग स्टाफ आपातकालीन डॉक्टर से दूरभाष पर बात करती है। इस पर डॉक्टर कहता है कि आप पीएमओ से बात कीजिए, मैं फाइल पर नोट्स नहीं डाल सकता। फिर नर्सिंग स्टाफ पीएनसी वार्ड में सुबह ड्यूटी पर आई डॉक्टर स्वाति को कॉल पर बुलाने का आग्रह करती है। इस टालमटोल से परिजन परेशान होते रहे।
फिर डाले नोटिस--
गायनिक वार्ड में सर्जन मुकेश स्वामी ने इन दोनों रोगियों की फाइल पर नोट्स डाले। इसके बाद दोपहर पौने दो बजे रक्त चढ़ाने की कार्रववाई शुरू की गई। हालांकि, इसके बाद फास्ट कॉल पर डॉ. ज्योत्सना चौधरी भी आ गई।
--
सुबह जिस डॉक्टर ने ब्लड डिमांड स्लिप पर हस्ताक्षर किए थे, वहीं डॉक्टर फाइल पर नोट्स डालेगा। रोगी के ब्लड रिएक्शन हो जाए या कोई और दिक्कत हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। इस कारण फाइल पर नोट्स डालने से इनकार किया था।
डॉ. रामपाल, आपातकालीन ड्यूटी कक्ष।
डॉक्टर के सामने ही रोगी के खून चढ़ाया जाना चाहिए। अगर ब्लड लाने में देरी हुई तो डॉक्टर को नर्सिंग स्टाफ को बताकर जाना चाहिए था कि नोट्स कौन डालेगा। संबंधित डॉक्टर से इस संबंध में पूछा जाएगा।
डॉ. राजाराम भादू, गायनिक वार्ड प्रभारी ।





No comments:
Post a Comment