जयपुर/अलवर. अलवर गैंग रेप की वीडियो काफी वायरल हो चुकी है। अगर उस वीडियो को आपने भी वायरल किया है तो सावधान हो जाएं। गैंगरेप मामले का वीडियो वायरल होने से पीडि़ता की पहचान उजागर हो रही है। अधिवक्ता दीपक चौहान ने बताया कि ऐसे वीडियो को फॉरवर्ड करना कानूनी अपराध है। यह कृत्य आइपीसी की धारा 228ए के साथ आइटी एक्ट की धारा 67 व 67ए के तहत अपराध माना गया है। आइपीसी की धारा 228 ए के तहत दो वर्ष तथा आइटी की एक्ट की 67 व 67 ए के तहत पांच वर्ष की सजा व दस लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। मोबाइल में वीडियो मिलने पर महिला अशिष्टरुपण अधिनियम 1986 के तहत दो साल की सजा व दो हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है।
लोग भी कर रहे अपराध
सोशल मीडिया पर दूसरे लोग भी यह अपराध कर रहे हैं। आईटी एक्ट के मुताबिक भी दुष्कर्म पीडि़ता की कोई भी पहचान सोशल मीडिया पर एक दूसरे को नहीं भेज सकते। यह भी अपराध है। ऐसा करने वाले कानून की चपेट में आ सकते हैं। सामूहिक बलात्कार का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसकी जांच होने पर वीडियो वायरल करने वाले भी फंस सकते हैं।





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