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VIDEO टी-104 के पैर में पड़े कीड़े, वन विभाग ने किया टे्रकुंजलाइज

सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर में एक बार फिर से बाघ को टेकुंलाइज करने की कवायद शुरू की गई है। वन विभाग की टीम रणथम्भौर के जोन पांच के भदलाव इलाके में विचरण करने वाले बाघ टी-104 को टेकुंलाइज किया गया है। वन विभाग की टीम द्वारा बाघ के उपचारके बाद बाघ को जंगल में छोड़ दिया गया है। गौरतलब है कि बाघ के घाव में कीड़े पड़ गए थे। ऐसे में वह शिकार नहीं कर पा रहा था और बेहद पतला हो गया था। इस दौरान रणथम्भौर बाघ परियोजना के सीसीएफ मनोज पाराशर, उपवन संरक्षक मुकेश सैनी, टेकुंलाइजर एक्सपर्ट राजवीर सिंह आदि मौजूद थे।
फार्म में किया टे्रकुंलाइज
वन विभाग की टीम ने शाम करीब पांच बजे बाघ को कुण्डेरा रेंज के भदलाव के पास एक फार्म हाउस में टे्रकुंलाइज किया। इसके बाद पशु चिकित्सक डॉ. राजीव गर्ग ने बाघ के पैर में हो रहे घाव से कीड़े निकाले और उसका उपचार किया। उपचार के बाद वन कर्मियों ने बाघ को धाकड़ा वन क्षेत्र में छोड़ दिया।
फिर लगाया रेडियो कॉलर
वन विभाग की टीम ने बाघ के उपचार के बाद बाघ की मॉनिटरिंग के लिए उसके गले में एक बार फिर से रेडियो कॉलर लगाया है। गौरतलब है कि पूर्व में फरवरी माह में खेतों में बाघ को टे्रकुंलराइज करने बाद भी विभाग द्वारा रेडियो कॉलर लगाया गया था हालांकि कुछ ही दिन बाद बाघ का रेडियो कॉलर जंगल में गिर गया था।
गत माह हो गया था घायल
गत माह एक अप्रेल को बाघ टी-104 व टी-64 में रणथम्भौर के धाकड़ा वन क्षेत्र में आपसी संघर्ष हो गया था। इसमें बाघ टी-104 के पैर में चोट आई थी। वन विभाग की ओर से तब से ही बाघ की लगातार निगरानी रखी जा रही थी। हालांकि पूर्व में विभाग की ओर से बाघ की हालत में सुधार बताया जा रहा था।
वन विभाग उपलब्ध करा रहा था शिकार
बाघ के घायल होने और एक पैर में बड़ा घाव होने के कारण बाघ तीन पैर से ही चल रहा था घाव वाले पैर को बाघ जमीन पर नहीं टिका पा रहा था ऐसे में बाघ लंगड़ाकर पानी के पास तो पहुंच रहा था लेकिन शिकार नहीं कर पा रहा था ऐसे में विभाग की ओर से बाघ के लिए शिकार भी बांधा गया था।
टे्रकिंग के दौरान नजर आए कीड़े
वन विभाग की ओर से बाघ की टे्रकिंग कराई जा रही थी साथ ही निगरानी के लिए कैमरे भी लगाए गए थे। ऐसे में गत दिनों कैमरों में बाघ के पैर में हो रहे घाव में कीड़े पडऩे की आशंका नजर आई थी। इसके बाद अब विभाग की ओर से बाघ को ट्रेकुंलाइज करने की कवायद शुरू की गई है।
पहले भी किया था टे्रकुंलाइज
बाघ टी-104 को वन विभाग की ओर से एक बार पहले भी टेकुंलाइज किया जा चुका है। फरवरी में बाघ जंगल से निकलकर भदलाव के पास खेतों में आ गया था इससे पहले उसने पालडी में एक महिला पर हमला भी किया था इसके बाद वन विभाग ने बाघ को टे्रकुंलाइज कर जंगल में छोड़ा था।
यूं चला घटना क्रम....
1.40 पर बाघ के फार्म हाउस में होने की मिली सूचना
2.00 बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
4.00 पर बाघ को टे्रकुं लाइज किया गया।
6.00 बजे तक चला बाघ का उपचार
6.10 बजे रेडियो कॉलर लगाया गया
6.40 पर बाघ को धाकड़ा वन क्षेत्र में छोड़ा
इनका कहना है...
बाघ कई दिनों से लंगडा कर चल रहा था। उसके घाव में कीड़े पड़ गए थे ऐसे में उसे जंगल के समीप एक फार्म हाउस में टे्रकुंलाइज कर उसका उपचार किया गया। इसके बाद रेडियो कॉलर लगाकर धाकड़ा वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
- मनोज पाराशर, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।



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