सवाईमाधोपुर. भले ही सरकार ने सभी को प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य रुप से देने के लिए 2005 शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर, बीपीएल, अनाथ आदि बच्चों को निजी विद्यालयों में नि:शुल्क प्रवेश देने का प्रावधान किया था। ताकि देश के सभी बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा सके। लेकिन जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते जिले में शिक्षा के अधिकार अधिनियम की पालना नहीं हो पा रही है। और विद्यार्थियों व अभिभावकों को परेशानी हो रही है।
किताबों व यूनिफार्म के नाम पर लगा रहे चपत
निजी स्कूल संचालक आरटीआई के तहत विद्यार्थियों को स्कूलोंं में दाखिला तो दे देते हैं लेकिन दाखिला देने के बाद विद्यार्थियों के अभिभावकों से यूनिफार्म व पाठ्य सामग्री के नाम पर मोटी राशि वसूल कर रहे है। इससे गरीब अभिभावकों पर आर्थिक भार पड़ रहा है साथ ही विद्यार्थी भी शिक्षा से वंचित रह रहे हैं। साथ्र ही निजी स्कूल संचालक किताबों व यूनिफार्म के नाम पर कमीशन का खेल भी खेल रहे हैं। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय संचालक कुछ चुनिंदा दुकानदारों से किताबे व यूनिफार्म मंगाकर मोटा कमीशन वसूल रहे हैं।
ये है नियम
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बीपीएल, अनाथ, आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा से जोडऩे के लिए केन्द्र सरकार की ओर से शिक्षा का अधिकार लागू किया गया था इसके तहत गरीब अभिभावकों के बच्चों को निजी विद्यालयों में नि:शुल्क प्रवेश देने का प्रावधान किया गया था। इसके एवज सरकार की ओर से निजी स्कूल संचालकों को 14 हजार रुपए सालाना अनुदान दिया जाता है।
जुर्माने व सजा का है प्रावधान
आरटीई की पालना को सुनिश्चित कराने के लिए अधिनियम में जुर्माने व सजा का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत यदि कोई स्कूल संचालक आरटीई के तहत प्रवेश लेने से इंकार करता है या फि र विद्यार्थियों या अभिभावकों से किसरी प्रकार का शुल्क वसूल करता है या बीच सत्र में विद्यार्थी को विद्यालय से निकाल देता है तो पहली बार ऐसा करने पर विद्यालय संचालक पर 50 हजार तक का जुर्माना लगाया जाता है साथ ही दुबारा ऐसा करने पर मान्यता रद्द करने व दो साल तक की सजा तक का प्रावधान है।
ये हैं निजी स्कूलों के आंकड़े.....
ब्लॉक स्कूल
सवाईमाधोपुर 217
गंगापुर सिटी 198
बामनवास 64
बौंली 76
मलारना 31
खण्डार 75
चौथ का बरवाड़ा 68
ये बोले अभिभावक...
निजी स्कूल संचालक कर रहे मनमानी
निजी स्कूल संचालक यूनिफार्म व किताबों के नाम पर राशि वसूल रहे हैं। जबकि सरकार की ओर से नि:शुल्क शिक्षा का प्रावधान है लेकिन निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी कर रहे हैं।
- हरिमोहन योगी, अभिभावक, निवासी आलनपुर।
पड़ रहा आर्थिक भार....
सरकार ने गरीब बच्चों को शिक्षा से जोडऩे के शिक्षा का अधिकार लागू किया है लेकिन स्कूल संचालक इसमें भी राशि वसूल रहे हैं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक भार पड़ रहा है।
- मनोहर गुर्जर, अभिभावक, निवासी आलनपुर।
बजट का बनाते है बाहना
स्कूल संचालक किताबो आदि के नाम पर बार बार राशि की मांग करते है। नि:शुल्क शिक्षा की बात करते है तो बजट नहीं आने की बात कहकर टाल देते है। इससे अभिभावकों को परेशानी हो रही है।
- हंसराज गुर्जर, अभिभावक, निवासी आलनपुर।
यह बोले साामाजिक कार्यकर्ता....
आरटीई के तहत बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का प्रावधान है लेकिन कई स्कूल संचालक युनिफार्म व पाठ्य सामग्री के नाम पर राशि वसूल रहे हैं। जो कि गलत है। इस संबंध में मेरे पास भी अब तक कई मामले आ चुके हैं।
- हरिप्रसाद योगी, अध्यक्ष, कंज्यूमर लीगल हेल्प सोसायटी, सवार्ईमाधोपुर।
इनका कहना है....
यह सही है कि कुछ निजी स्कूल संचालक आरटीई की पालना नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में जल्द ही जांच करके कार्रवाई की जाएगी।





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