सवाईमाधोपुर. कुपोषण की मार झेल रहे मासूम बच्चों के इलाज को लेकर न तो अभिभावक गंभीर हैं न ही सरकारी मशीनरी। इसका परिणाम यह है कि सामान्य चिकित्सालय स्थित कुपोषित वार्ड प्रियदर्शनी एमटीसी यूनिट में आधे से अधिक बेड खाली पड़े रहते हैं। ऐसा नहीं है कि जिले में कुपोषण पूरी तरह खत्म हो गया है। सरकारी आंकड़ों में कुपोषित बच्चों की अच्छी.खासी संख्या है लेकिन इनका इलाज क्यों नहीं हो रहा। इसका जवाब जिम्मेदार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग भी लापरवाही बरतने में पीछे नहीं है। रही सही कसर अभिभावकों की अल्प जानकारी और जागरूकता के अभाव ने पूरी कर दी है।
दस साल में 602 बच्चे हुए भर्ती
प्रियदर्शनी एमटीसी यूनिट में पिछले करीब दस साल में 602 कुपोषित बच्चे ही भर्ती हुए हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि भर्ती रोगी बालकों में से कुछेक बालक ही पूरा इलाज ले पाए हैं जबकि अधिकांश बालकों को परिजन इलाज के दौरान ही छुट्टी लिए बिना ही घर ले जाते हैं। चिकित्सा महकमे के अनुसार जिले में करीब 3 हजार बालक कुपोषण के शिकार हैं।
165 रुपए प्रतिदिन का प्रोत्साहन फिर भी नहीं रुझान
चिकित्सकों ने बताया कि कि कुपोषण से पीडि़त पांच वर्ष तक के बालक या बालिका को शारीरिक रूप से सामान्य स्थिति में लाने के लिए कम से कम 5 दिन तक वार्ड में भर्ती रखना पड़ता है। इसके लिए बच्चे के परिजनों को प्रतिदिन के हिसाब से 165 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। छह माह तक बच्चे का उपचार चलता है। प्रत्येक माह में 15 दिन रोगी को शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ से जांच करवाकर परामर्श आधार पर सही उपचार देना होता है।
यह है कुपोषित बच्चों की खुराक
अद्र्ध कुपोषित बच्चों को 100 ग्राम बॉयोमिक्स
कुषोषित बच्चों को 125 ग्राम बायोमिक्स
गंभीर कुषोषित बच्चों को 150 ग्राम बॉयोमिक्स
गंभीर कुषोषित बच्चों को आयरन की अतिरिक्त खुराक
कब कितने बच्चे हुए भर्ती
2009 9
2010 30
2011 23
2012 75
2013 48
2014 100
2015 137
2016 65
2017 55
2018 45
मार्च 2019तक 15
इनका कहना है....
जिले में कुषोषण पर अंकुश लगा है। जिला अस्पताल व स्वास्थ्य विभाग के पास कुपोषण की प्र्याप्त दावाएं उपलब्ध है। इसके लिए जिला अस्पताल में एक वार्ड भी संचालित है।जागरुकता के अभाव के कारण थोड़ी परेशानी होती है।
- डॉ.तेजराम मीणा, सीएमएचओ, सवाईमाधोपुर।





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