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World Cup इतिहास के ये मैच आज भी आते हैं याद, जब मैदान पर फफक-फफक कर रोए थे खिलाड़ी

नई दिल्ली। ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप का इतिहास बहुत ही दिलचस्प रहा है। कभी मैदान पर वर्ल्ड चैंपियन बनने की खुशी दिखी है तो कभी हार के आंसू। विश्व कप के इतिहास में कई मैच ऐसे रहे हैं, जो आज तक भी क्रिकेट फैंस के दिलों पर छाप छोड़े हुए हैं।

कुछ ऐसे ही पलों का जिक्र यहां हम कर रहे हैं।

2015 में अफ्रीकी की टीम रोई थी फूट-फूटकर

- 2015 वर्ल्ड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में हुआ था। फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को मात देकर खिताब पर कब्जा किया था। वहीं इससे पहले न्यूजीलैंड ने सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराया था। ये हार अफ्रीकी टीम के लिए इतना बड़ा झटका थी कि टीम के सभी खिलाड़ी मैदान पर फफक-फफक कर रोने लगे थे। एबी डिविलियर्स, मोर्कल, डेल स्टेन और फाफ डुप्लेसिस को मैदान पर रोते हुए देखा गया था।

1996 विश्व कप में रोए थे विनोद कांबली

- 13 मार्च को ईडन गार्डंस में खेला गया 1996 का वर्ल्ड कप सेमीफाइनल भारतीय टीम के लिए दिल तोड़ने वाला था। पवेलियन लौटते वक्त विनोद कांबली फूट-फूटकर रोए थे। उस वक्त की तस्वीरें आज भी भारतीयों के दिल को दुखाती हैं। इस मैच में सचिन तेंदुलकर के आउट होते ही पूरी भारतीय टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी। भारतीय टीम की हालत देख कोलकाता में भारतीय फैंस गुस्से में आ गए थे और मैदान में ही हंगामा मचा दिया था। लोगों ने मैदान पर बोतले फेंकनी शुरू कर दी। कुर्सियां तोड़ डाली और बैनरों में आग लगा दी। हालात बिगड़ते देख मैच बंद कर श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया।

2007 वर्ल्ड कप भारतीय क्रिकेट के लिए था काला अध्याय

- 2007 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की हार को आखिरी कौन भूल सकता है। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में वो किसी काले अध्याय से कम नहीं था, जब भारतीय टीम ग्रुप राउंड में ही बांग्लादेश और श्रीलंका से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी। उस वक्त की टीम में सचिन, द्रविड़ और गांगुली जैसे दिग्गज प्लेयर भी थे। उस हार के बाद भारत में नाराज प्रशंसकों ने खिलाड़ियों के पुतले जलाए और उनके घरों पर पत्थरबाजी की थी। कोच ग्रेग चैपल की भी खूब फजीहत हुई थी।

1999 में भी अफ्रीकी टीम रह गई थी खिताब से दूर

- दक्षिण अफ्रीका 2015 से पहले 1999 में खिताब से दूर रह गई थी। 17 जून 1999 को खेले गए वर्ल्ड कप सेमीफाइनल मैच में एक गलती दक्षिण अफ्रीका को भारी पड़ गई थी। 214 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका को आखिरी ओवर में नौ रन की दरकार थी। आखिरी जोड़ी के रूप में क्लूजनर व डोनाल्ड थे। क्लूजनर ने लगातार दो गेंदों पर चौके जड़ दिया। फाइनल की राह एकदम आसान थी, लेकिन चौथी गेंद पर क्लूजनर और डोनाल्ड में गलतफहमी हो गई। एक रन लेने की कोशिश में डोनाल्ड रनआउट हो गए और दक्षिण अफ्रीका का खिताबी सपना भी टूट गया। हालांकि मैच टाई हुआ लेकिन सुपर-सिक्स चरण में ज्यादा अंक के कारण ऑस्ट्रेलिया फाइनल में पहुंचा और फिर चैंपियन बना।



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