उदयपुर/ फलासिया. अंतरराज्यीय सीमा पर गुजरात से सटी उदयपुर की फलासिया पंचायत समिति में बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के नाम पर अंधेरगर्दी पसरी हुई है। महिला एवं बाल विभाग के अधीन संचालित क्षेत्र की कुल 134 आंगनबाड़ी केंद्र नेतृत्व के अभाव में दिशाविहिन हो रखे हैं। सुपरवाइजर और सीडीपीओ जैसे महत्वपूर्ण पदों को लेकर सरकारी अनदेखी से बच्चों का स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों ही दांव पर लगे हुए हैं। लेकिन, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र का दुर्भाग्य ही है कि रिक्त पदों को लेकर विभाग एवं सरकार में बैठे जिम्मेदार क्षेत्र को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे। इतना ही नहीं सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर यहां कोई धणीधोरी नहीं है।
१ सुपरवाइजर और ३ सेक्टर
हकीकत यह है कि विभाग स्तर पर फलासिया क्षेत्र की आंगनबाड़ी को ६ सेक्टर में बांटा हुआ है। इसमें फलासिया, सोम, पानरवा, बिरोठी, मादड़ी और कोल्यारी शामिल है। प्रत्येक सेक्टर के हिसाब से यहां ६ सुपरवाइजर्स का नियंत्रण होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में दो सुपरवाइजर्स को ३-३ सेक्टर्स की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। यानी की एक सुपरवाइजर को दो सेक्टर्स की जिम्मेदारी अतिरिक्त भार स्वरूप मिली हुई है। खास तो यह है कि ये सुपरवाइजर भी फलासिया की नहीं होकर झाड़ोल पंचायत समिति के अधीन हैं। इस हिसाब से ये सुपरवाइजर प्रतिदिन एक आंगनबाड़ी की विजिट करे तो भी एक वर्ष में प्रति आंगनबाड़ी केंद्र पर पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में राजकीय योजनाओं की क्रियान्विति का अंदाजा स्वत: ही लगाया जा सकता है।
पंचायत समिति में होना था कार्यालय
सुपरविजन के लिहाज से फलासिया पंचायत समिति के नवगठन के बाद से सभी विभागों के अधिकारियों को पंचायत समिति मुख्यालय पर उनका कार्यालय खोलना था, लेकिन महिला व बाल विकास विभाग प्रतिनिधि के तौर पर मुख्यालय पर कोई नहीं रहता। ऐसे में आंगनबाड़ी की आम कार्यकर्ता से लेकर आमजन को समस्या निस्तारण के लिए 100 से 150 किलोमीटर दूरी तय कर झाड़ोल जाना पड़ रहा है। वर्ष 2015 में झाड़ोल से अलग होकर गठित फलासिया पंचायत समिति की आंगनबाड़ी केंद्रों पर अब भी झाड़ोल पंचायत समिति लिखा हुआ है।
चुनौती से कम नहीं
पहले ही विभागीय लोड अधिक है। उस पर दो अतिरिक्त सेक्टर्स का भार ज्यादा हो जाता है। गुजरात सीमा तक स्थित आंगनबाडिय़ों में हम महिलाओं को पहुंचना मुश्किल भरा होता है। समस्याएं तो आती हैं।
राजू पूर्बिया, सुपरवाइजर, अतिरिक्त प्रभार फलासिया
गया ही नहीं फलासिया
मैं झाड़ोल में रहता हूं। फलासिया कभी गया ही नहीं। सीडीपीओ का अतिरिक्त प्रभार है। स्टाफ की कमी से उच्चाधिकारी अवगत हैं। वैसे भी नियुक्ति कार्य डीडी का है। मेरा कार्य सिर्फ कार्मिकों का वेतन बनाने व मोनेटरिंग का है।
पन्नालाल मेघवाल, सीडीपीओ, अतिरिक्त प्रभार झाड़ोल





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