मुकेश शर्मा / जयपुर. मालवीय नगर स्थित प्रधान मार्ग पर तेज रफ्तार कार ने 11वीं कक्षा के छात्र आयुष की जिंदगी छिन ली। लेकिन अब परिजन उसकी यादों में खोए हैं। हादसे से तीन घंटे पहले आयुष अपने एसी लगे हुए कमरे में माता-पिता को सोने के लिए दवाब बनाया था। माता-पिता यह कहते हुए बिलख पड़े कि बेटा चाहता था कि आज हम उसकी जगह एसी में सोएं और वह दूसरे कमरे में सो जाएगा।
पिता अतुल खत्री की आंखों में बेटे जाने के आंसू छलक रहे थे, वे इतना ही बोले कि भांजा देव घर पर आया हुआ था। सोमवार रात को बेटे आयुष और देव को सत्कार शॉपिंग सेंटर आइसक्रीम खिलाने ले गया था। यह पता नहीं था कि बेटे को आज आखिरी बार आइसक्रीम खिला रहा हूं।
वहीं आयुष की मां को परिजन ढांढ़स बंधाने में लगे थे। मां किरण, उसी कमरे में थीं, जिसमें आयुष उन्हें सोने के लिए बोलकर गया था। पिता बोले कि आयुष पढऩे में होशियार था, हाल ही दसवीं में उसके 86 फीसदी अंक आने पर स्कूल ने भी सम्मानित किया था। वहीं आयुष के चाचा बोले कि भतीजा हमेशा उन्हेंछोटे पापा कहकर बुलाता था। वह सभी को साथ लेकर चलता था। कभी किसी का बुरा नहीं सोचता था।
पेड़ और कार के बीच सिमट गई बेटे की जिंदगी
अतुल खत्री ने बताया कि कार नंबर से घर का पता कर रात करीब 2.15 बजे पुलिस घर पर आई। तब हादसे की जानकारी मिली। दौड़कर घटना स्थल पहुंचे। आग तो बुझा ली गई थी, लेकिन पेड़ में कार को आगे का हिस्सा बुरी तरह फंसा हुआ था। पेड़ और कार की बीच बेटे की जिंदगी फंसी थी। सुबह करीब सवा पांच बजे जाकर बड़ी मशक्कत के बाद कार को पेड़ से अलग किया गया और फिर कार में चिपक गए बेटे का शव बाहर निकाला।
खिलखिला रहे था आयुष और देव
अहमदाबाद में पढ़ाई कर रहे दिव्यांश ने बताया कि सोमवार रात को वीडियो कॉल कर छोटे भाई आयुष से बात की, तब देव भी उसके साथ था। आयुष अच्छे से पढऩे की नसीहत दे रहा था। तब आयुष और फुफेरा भाई देव दोनों, बहुत जोर से हंस रहे थे। ऐसे लग रहा है भाई आयुष यहां ही है और उसकी हंसी कानों में सुनाई दे रही है।
अस्पताल में एक ही बात बोल रहा...
उधर, हादसे के समय कार चला रहे आयुष के फुफेरे भाई देव को एसएमएस अस्पताल में होश आ गया। हालांकि चोट लगने और झुलसने के कारण अभी भी उसकी तबीयत स्थिर है। परिजनों ने बताया कि जब भी देव कुछ बोलता है तो आयुष का घर का नाम अन्ना लेता है और पूछता है अन्ना कहां है...अन्ना से मिलना है..., उसे यहां बुलाकर लाओ। अब देव को कौन बताए कि अन्ना अब इस दुनियां में नहीं रहा। बस अन्ना की यादें ही परिवार के पास रह गई हैं।





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