अलवर. सरिस्का बाघ परियोजना में बाघ की ज्यादा से ज्यादा साइटिंग के लिए पर्यटकों के लिए नए मार्ग खोले जाएंगे। यह निर्णय बुधवार को जयपुर में संभागीय आयुक्त केसी वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित सरिस्का एडवायजरी कमेटी की बैठक में किया गया।
संभागीय आयुक्त ने बताया कि बैठक में सरिस्का में बाघों की साइटिंग कम होने पर चिंता जताई गई। रणथंभौर की तुलना में पर्यटकों को बाघ कम दिखने से सरिस्का की ख्याति प्रभावित होती है। सरिस्का में बाघों की ज्यादा से ज्यादा साइटिंग के लिए दो-तीन नए मार्ग खोलने पर चर्चा की गई।
बाघों की मौत पर चिंता
बैठक में सरिस्का में बाघों की मौत पर चिंता जताई और मौत के कारणों की जांच को जरूरी बताया गया। सरिस्का में पिछले दिनों कई बाघ-बाघिन की मौत हो चुकी है।
तीन शावकों के गायब होने की जांच कराई जाए
सरिस्का में पिछले महीनों बाघिन एसटी-10 के तीन शावक अचानक गायब हो गए थे। इन शावकों के अचानक गायब होने की जांच कराने की जरूरत बताई गई। जिससे पता चल सके कि शावकों की मौत हो गई या फिर कहीं गुम हो गए।
खाद्य सामग्री डालने पर जुर्माना
सरिस्का में बंदरों की संख्या बढऩे और जंगल क्षेत्र से बाहर तक निकल कर लोगों को नुकसान पहुंचाने को भी गंभीरता से लिया गया। बैठक में सरिस्का के दोनों ओर स्थित चेक पोस्ट पर वाहनों की जांच कराने और बंदरों को खाद्य सामग्री डालने पर पाबंदी लगाने के निर्देश दिए गए। बंदरों को खाद्य सामग्री डालने पर जुर्माना लगाने की भी जरूरत बताई गई। वहीं मंगलवार व शनिवार को पाण्डुपोल जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ की समस्या से बचने के लिए वाहनों की पार्किंग पार्क से बाहर कराने और वहां से मंदिर तक श्रद्धालुओं को ले जाने की व्यवस्था कराने पर जोर दिया गया। इसके अलावा सरिस्का के बाहर साइन बोर्ड लगवाने सहित कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में सरिस्का के सीसीएफ घनश्याम शर्मा, डीएफओ सरिस्का सेढू राम यादव, डीएफओ वानिकी अलवर डॉ.आलोक गुप्ता, अतिरिक्त जिला कलक्टर द्वितीय भगवतसिंह देवल, सदस्य एडवोकेट संजीव कारगवाल, नरेन्द्र सिंह राठौड़, अनिल जैन, दिनेश दुर्रानी आदि मौजूद थे।





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