उदयपुर/ झाड़ोल. उपखण्ड मुख्यालय क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में रोजगार देने के नाम पर स्थानीय लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। एक दिन के रोजगार के बदले उन्हें दोपहरी की कड़ी धूप में गरम लपटों के बीच तपाया जा रहा है। कार्य स्थल पर टेंट, दवा, पानी, बच्चों के लिए पालना जैसी सुविधाओं को गौण करके ग्राम पंचायतें मजदूरों के साथ मजाक कर रही हैं। तपती दोपहरी में बिन सुविधा के हो रही ऐसी ही मजदूरी की शिकायत पर पत्रिका ने पड़ताल की तो एक बार फिर चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। ग्राम पंचायत ब्राह्मणों का खेरवाड़ा के फुटिया तालाब एनिकट से गाद निकालने के कार्य के दौरान 117 श्रमिकों के जारी मस्टररोल के बावजूद मौके पर 71 श्रमिक पाए गए। गर्मी में मजबूरी के बीच शेष श्रमिकों के लिए मौके पर न तो टेंट की सुविधा दिखी और लू से बचने जैसी कोई दवाइयां मौके पर मिली।
गौरतलब है कि ऐसी स्थिति तब बनी हुई है, मनरेगा के नाम पर फर्जी भुगतान उठाने और ऑनलाइन बताई गई संख्या के जवाब कार्य स्थल पर मजदूरों का फर्जीवाड़े के नित नए खुलासे हो रहे हैं। विशेष पर जिला परिषद प्रशासन फिलहाल झाड़ोल उपखण्ड क्षेत्र को लेकर खुद को संजीदा बता रहा है।
६० वर्ष से अधिक के मजदूर
मौके पर खास बात यह देखने को मिली नियम कायदों को ताक में रखकर योजना के तहत 60 साल से अधिक आयु वाले करीब दो दर्जन लोग मौके पर मजदूरी करते दिखाई दिए। योजना के कायदे के तहत मजदूर की आयु 60 वर्ष से कम निर्धारित की हुई है। पड़ताल में ही सामने आया कि मजदूरों की हाजरी सुबह 7 बजे लेने का समय निर्धारित है। बुधवार को निरीक्षण के तहत एलडीसी को मौके पर आना था, लेकिन इसके बाद भी किसी स्तर पर मजदूरों की उपस्थिति को लेकर निरीक्षण नहीं हुआ। पड़ताल में ही सामने आया कि सुबह ९ बजे तक कार्यस्थल पर मजदूरों की हाजरी भी नहीं लगी गई थी। मस्टररोल खाली थे।
मेट को उपलब्ध टेंट
टेंट की सुविधा संबंधित मेट को उपलब्ध कराई गई है। नहीं लगाया तो उसकी गलती है। श्रमिकों की हाजरी समय पर लेने की जिम्मेदारी भी मेट की है। निरीक्षण चार्ट के तहत बुधवार को एलडीसी का निरीक्षण था।
रामस्वरूप मीणा, ग्राम विकास अधिकारी, ब्राह्मणों का खेरवाड़ा





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