अजमेर. किसी भी देश की तरक्की और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बहुत जरूरी है। यह बात सेवानिवृत्त आईएएस हर्ष मंदर ने कही। वे विजय सिंह पथिक श्रमजीवी कॉलेज में पीयूसीएल के 10वें दो दिवसीय राज्य सम्मेलन के प्रथम दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज संविधान की बहाली की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर आन पड़ी है।
देश की आजादी के दौरान बिगड़े साम्प्रदायिक माहौल में गांधीजी ने कहा था कि मेरा काम तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक देश में आपसी भाईचारा कायम नहीं हो पाए। यही चुनौती आज भी हमारे सामने है। एेसे में हमें संविधान को पढऩा और समझना होगा, तभी हम इसकी रक्षा कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि बंधुता पूरे देश में चरमरा गई है। इस बढ़ती नफरत को देखते हुए ही हमने कारवां ए मोहब्बत यात्रा चालू की।
सामाजिक कार्यकर्ता और मैग्सेसे अवार्ड विजेता अरुणा रॉय ने कहा कि पीयूसीएल को कई बार दबाने, डराने की कोशिशें हुईं पर यह संगठन मजबूत होता गया। उन्होंने कहा कि हमें नैतिकता को हमें लाना होगा। हिंसा और अहिंसा के बीच क्या सोच है, उसे अच्छी तरह समझना होगा।
उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि पिछले कुछ साल में फेक न्यूज का चलन बढ़ा है। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और साम्प्रदायिक संदेश भरे पड़े हैं। हमें इन्हें समझना और इनसे बचना होगा। उन्होंने कहा कि युवा कानून की जानकारी लें और इसे रोजगार के साथ अपने अधिकार प्राप्त करने का जरिया बनाएं।
राज्य अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने कहा कि आज लोकतांत्रिक संस्थाएं ढह रही हैं। सब कुछ बदल गया है। खतरा बहुत ज्यादा है। हमें छोटे बड़े की सोच से निकलकर एक-दूसरे का हाथ थामे रखकर कानून को समझना होगा।
सम्मेलन में डी. एल. त्रिपाठी, पी. एल. मीमरोठ, निशात हुसैन, हर्ष मंदर और शादान फरासत का सम्मान किया गया। सम्मेलन के दूसरे सत्र में राजस्थान में पुलिस थाना, अदालत व आयोगों की प्रतिक्रिया महिला, दलित, आदिवासी व अल्पसंख्यक के मानवाधिकारों के हनन के संदर्भ में चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता ममता जेटली ने की।
नीलाभ मिश्र स्मृति व्याख्यान
नीलाभ मिश्र स्मृति व्याख्यान में अहमदाबाद की लोकनाद के निदेशक विनय महाजन ने लोकगीत गाकर संगीत के माध्यम से हाथों की अहमियत बताई। कुम्हार मिट्टी के हाथ लगाकर ही पहचान लेता है कि मिट्टी का प्रकार क्या है और उसमें कौनसा खनिज निकल सकता है। यह उसके हाथों का ही हुनर है।
उन्होंने बताया कि हाथों के विकास के साथ नई-नई तकनीक का आविष्कार किया गया। इससे पूर्व निखिल डे ने दिवंगत नीलाभ मिश्र का परिचय दिया। इस अवसर पर ईशमधु तलवार आदि मौजूद थे।





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