उदयपुर/ गुड़ली. भीषण गर्मी से तप रही धरती के भीतर निरंतर गिरते भूजल स्तर के बीच गुड़ली औद्योगिक क्षेत्र के अधिकांश बोरवेल इन दिनों केमिकल युक्त पानी बाहर फेंक रहे हैं। ये पानी जहरीला होने के साथ इंसानी उपयोग का नहीं है। इस पानी से पशुओं को भी दूर नहीं रखा जा रहा है, बल्कि आम आदमी इस पानी से कपड़े धोने में भी असहाय बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय बाशिंदों को उनके भविष्य और आने वाली पीढिय़ों को लेकर चिंता सताने लगी है। इधर, ओड़वाडिय़ा में तो जमीनी पानी के साथ आने वाले झाग से आमजन भयभीत है। मजबूरी में लोग दो किलोमीटर से पानी लाकर गुजारा कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित बहुत सी निजी फैक्ट्रिया केमिकल युक्त गंदगी को जमीन के भीतर उतार रही हैं। इससे समीपवर्ती ट्यूबवेल में पानी खराब आने लगा है। सलोनी वे ब्रिज के समीप डालचंद लौहार सहित तीन चार जनों के बोरवेल में पानी खराब होने की शिकायत है। इसके अलावा गांव के अधिकांश इलाकों में भूजल की गुणवत्ता खराब होने की भी सूचनाएं निरंतर मिल रही है। गांव में सक्षम परिवारों ने ट्यूबवेल का पानी पीना छोड़ दिया है। गरीब परिवार जिंदगी को दांव पर लगाकर इस पानी को पी रहा है। समस्या से ग्रामीणों में चरम रोग सहित ढेरों बीमारियों के बढऩे का संकट दिन प्रतिदिन गहरा रहा है।
केमिकल की हैं फैक्ट्रियां
क्षेत्र की हकीकत जानें तो यहां वर्तमान में 8 से 10 केमिकल फैक्ट्रियां संचालित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बहुतायत में स्थापित फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी नालियों में छोड़ा जा रहा है। ग्रामीणो ने कई बार प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को इस बारे में अवगत कराया, लेकिन किसी भी स्तर पर समस्या के समाधान को लेकर हल नहीं तलाशा गया। बल्कि गरीब परिवारों को जहर पीने के लिए मजबूर किया गया। समीपवर्ती ओड़वाडिय़ा में तो कुओं से चलने वाली मोटरों से आने वाला पानी तो झाग फेंकता हुआ साफ दिखता है। ग्रामीणों को दो किलोमीटर दूरी तय कर पानी लाना पड़ रहा है।
मुझे भिजवाएं नमूने
पानी के नमूनों को मेरे कार्यालय में भिजवाएं। मैं इसकी जांच करता हूं।
डॉ. बी.आर. पंवार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी





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