नसीराबाद (अजमेर). नगर की बड़ी-बड़ी होटलों से लेकर विभिन्न समारोहों में पीये जाने वाले आरओ के पानी की गुणवत्ता राम भरोसे है। इसकी वजह यह है कि आरओ के पानी की जांच खाद्य, सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नहीं की जा सकती। बहरहाल अब यह आरओ का पानी कानून के दायरे में लाया जा रहा है। ऐसे में पानी में किसी तरह की गड़बड़ी या फैक्ट्री में मापदंडों का पालन नहीं किया गया तो एक्ट के तहत कार्रवाई तय है। इसमें अधिकतम 4 लाख रुपए जुर्माना व आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। जिलेभर सहित नगर में भी आरओ का पानी बेचा जा रहा है। यह आरओ का पानी कैन आदि में भरकर भेजा जाता है जिसकी कीमत लगभग दो रुपए प्रति लीटर आती है। दफ्तरों, घरों, शादी समारोहों व अन्य बड़े कार्यक्रमों में लोगों को आरओ का पानी ही मिलता है। इसी तरह से इसका चलन विद्यालयों, रेलवे स्टेशनों के अलावा अन्य सार्वजनिक जगहों पर वाटर वेंडिंग मशीनें लगाई हुई हैं। हर जगह पानी का व्यावसायिक उपयोग होने के बावजूद भी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की ओर से न तो इसके नमूने लिए जा रहे हैं और न ही इसकी जांच हो पा रही है। आरओ का पानी बेचने वाले बड़े ही शातिराना ढंग से इस पानी को कैन में भरकर बेचते हैं और कैन को सील नहीं करते हैं जिसके कारण यह एक्ट के दायरे में नहीं आता है। अगर आरओ के पानी को सील कर बेचा जाता है तो वह पानी एक्ट के दायरे में आ जाता है। आरओ में इस्तेमाल होने वाला पानी पीने लायक है या नहीं गंदे पानी का उपयोग तो नहीं हो रहा। जिस प्लास्टिक के बर्तन में आरओ का पानी भरकर बेचा जा रहा है वह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक तो नहीं हैं। आरओ वाटर बनाने वाली कम्पनी में कार्यरत कर्मचारी टोपी व दस्ताने लगा रहे हैं या नहीं। कानूनी दृष्टि से उनकी मेडिकल रिपोर्ट भी होना आवश्यक है। आरओ फैक्ट्री में साफ-सफाई व जगह मापदंड के अनुसार है या नहीं, नमूने होने के बाद जांच में यह पता चल जाएगी कि पानी में रासायनिक तत्व, जीवाणु व अन्य हानिकारक चीजें तो नहीं मिली हैं यह सब जांच होने पर ही पता चल पाएगा। लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।





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