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अब वजूद बचाने की लड़ाई में सड़क पर उतरे पूर्व विधायक

उदयपुर/ कानोड़. तत्कालीन भाजपा सरकार में कानोड़ को तहसील मुख्यालय का दर्जा दिलाने में सफल रहे पूर्व विधायक रणधीरसिंह भींडर ने जनता के बीच अपना वजूद बनाए रखने के लिए एक बार फिर राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है। सत्ता पर बैठी विरोधी कांग्रेस सरकार एवं पार्टी के वल्लभनगर विधायक के क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित तहसीलदार की नियुक्ति को लेकर पूर्व विधायक शुक्रवार को सड़कों पर उतर आए। तहसीलदार की कमी से परेशान सैकड़ों ग्रामीण व जनता सेना कार्यकर्ताओं की आवाज बनकर उन्होंने सूरजपोल चौराहे से निकले जुलूस का नेतृत्व किया। बाद में तहसील कार्यालय पहुंचे। वहां अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे भींडर तहसीलदार भीमसिंह शक्तावत को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। भींडर ने चेताया कि ३० जून तक सरकार तहसीलदार सहित कार्मिकों की नियुक्ति नहीं करती है तो जनता मांगों को लेकर सड़क पर उतरेगी। ज्ञापन में तहसील भवन के बजट की भी मांग की गई। इधर, सूत्रों की मानें तो वर्तमान कांग्रेस सरकार भाजपा शासन में अंतिम छह माह में हुए फैसलों की कार्ययोजना के तहत तहसील का दर्जा समाप्त करने की तैयारी में है।
गौरतलब है कि वर्ष २०१७ के अप्रेल माह में 28 दिनों के आंदोलन के बाद प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने तहसील मुख्यालय की घोषणा की थी।
बावजूद इसके कानोड़ में सभी आवश्यक राजस्व कार्य उप तहसीलदार की मुहर से अंजाम दिए जा रहे हैं।

नदारद रहे आंदोलनकारी
पूर्व विधायक भींडर के नेतृत्व में जुटी भीड़ के बीच तहसील आंदोलन से जुड़े कई बड़े नेता मौके पर नहीं आए। प्रदर्शन में उनकी अनुपस्थिति को लेकर चर्चााओं का बाजार गरम रहा तो जनता के बीच ऐसे नेताओं को लेकर आक्रोश भी झलकता दिखा।

 



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