अजमेर. अजमेर विद्युत वितरण निगम के अधीक्षण अभिंयता अब मनमर्जी से चहेते ठेकेदारों को ठेका देकर उपकृत नहीं कर सकेंगे। अधीक्षण अभियंताओं को अब 2 लाख से अधिक के ठेके देने के लिए ऑन लाइन टेंडर प्रक्रिया अपनानी होगी। निगम के प्रबन्ध निदेशक के निर्देश के बाद मुख्य लेखाधिकारी ने इस सम्बन्ध में आदेश जारी कर दिए हैं। सभी नए कार्य जिनके जी शेड्यूल 5 लाख से अधिक के हैं उनके लिए ओपन टेंडर करने होंगे। सम्बन्धित अधीक्षण अभियंता को तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रत्येक माह की 7 तारीख को एसई टीडब्ल्यू को भेजनी होगी। आपातकाल की स्थिति में ठेका सीएलआरसी दर पर दिया जा सकेगा लेकिन इसके लिए प्रबन्ध निदेशक से मंजूरी लेनी होगी।
निगम ने करवाई जांच दो माह पूर्व निगम के 6 जिलों के अधीक्षण अभिंयताओं ने मनमर्जी करते हुए करोड़ों रुपए के ठेके बढ़ी हुई दरों पर ठेकेदारों को जारी कर दिए। मामला जानकारी में आने के बाद प्रबन्ध निदेशक ने सभी ठेके निरस्त कर नई दरों से ठेका देने के लिए निर्देश दिए। साथ ही अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, सीकर, झुंझुनू, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौडगढ़, राजसमन्द, डूंगरपुर तथा प्रतापगढ़ के अकाउंट ऑफिसर को जांच के आदेश भी दिए। प्रबन्ध निदेशक ने अकाउंट ऑफिसर को सभी प्रक्रियाओं को दो स्तर पर जांचने के निर्देश दिए कि रिपेयर एंड मेंटिनेंस का दोहरा भुगतान न हो इस पर ध्यान दिया जाए।
वित्तीय शक्तियां घटाई
अजमेर डिस्कॉम के एमडी ने सभी रिपेयर मेंटीनेंस के लिए दिए जाने वाले ठेके लिए मुख्य अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता तथा अधीक्षण अभियंताओं की वित्तीय शक्तियों में कमी की है। 1 अप्रेल 2018 से 31 दिसम्बर 2018 तक दिए गए वर्क ऑर्डर के कार्य पूरे नहीं होने एक्शन लेने तथा कार्य 30 जून तक पूर्ण करवाने के साथ ही अधीक्षण अभियंता को यह रिपोर्ट भी देनी होगी कि कार्य समय पर पूरा क्यों नहीं हुआ। 1 अप्रेल 2015 से 31 मार्च 2018 तक जारी वर्क ऑर्डर जो अभी भी अधूरे हैं/ फाइनल बिल समिट नहीं किए गए हैं ऐसे मामलों में भी एक्शन लिया जाए।





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