बालोतरा.
तरबूजे को देखकर खरबूजे का रंग बदलता है लेकिन इन दोनों का रंग तो पकने के बाद एेसा ही है बहरहाल किसानों के रंग बदल गए। खरबूज और तरबूज की बंपर पैदावार और इसके बाद किसानों को पकी फसल के अच्छे दाम आने का नाहक इंतजार महंगा पड़ गया। खरबूज और तरबूज बाजार में इतने ज्यादा आ गए कि अब इनको औने-पौने दामों में बेचना मजबूरी हो गया है। पिछले साल 15 रुपए किलोग्राम बिकने वाला खरबूज इस बार 8-10 रुपए आ गया और तरबूज 10 से गिरकर 5 रुपए में बिकने लगा है। ग्राहकों के लिए सस्ते हुए फल खुशियां लाए है और वे इसको भरपेट खाने लगे है लेकिन किसानों के चेहरे उतर गए है। अब इनको रखा जाए तो सड़ जाए एेसे में जितना भाव मिल रहा है उतने में बेचने में लगे है।
सस्ते में बिक रहे खरबूज-तरबूज-
बाजार में इन दिनों मुंह मांगी कीमत पर तरबूजा व खरबूजा की बिक्री हो रही है। हालत यह है कि चारा महंगा व फल सस्ता है। भीषण गर्मी के साथ इनके भाव सस्ते होने से इस वर्ष मौज बन गई है। खाने का भरपूर आनंद उठा रहे हंै।
गोपाराम पारंगी
ग्रामीण
लागत कीमत पर बेच रहे किसान- खरबूजा व तरबूजा के किसानों ने ऊंचे भावों को लेकर फल पकने के बाद भी फसल नहीं ली। इसके बाद इनके खराब होने व पीछे दूसरी फसल आने से अब से लागत कीमत पर बेच रहे हैं। इससे इस वर्ष भाव बहुत कम है।
गणपत माली
हॉलसेल फल कारोबारी
मेहनत जितनी भी नहीं मजदूरी- पिछले वर्ष तरबूजा व खरबूजा की फसल से अच्छी कमाई हुई थी। लेकिन इस वर्ष तो मेहनत जितनी भी मजदूरी नहीं मिल रही है। कम भावों से हालत खस्ता हो रखी है।
जोगसिंह किसान
मेहनत जितनी भी नहीं मजदूरी- पिछले वर्ष तरबूजा व खरबूजा की फसल से अच्छी कमाई हुई थी। लेकिन इस वर्ष तो मेहनत जितनी भी मजदूरी नहीं मिल रही है।
राणाराम किसान





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