भीलवाड़ा।
अलवर के थानागाजी में महिला से गैंगरेप के बाद हरकत में आई सरकार ने आधी दुनिया के लिए सुरक्षा और हर जगह बेहतर व्यवस्था कायम करने का दावा किया, लेकिन रोडवेज प्रबंधन ही महिला यात्रियों का खयाल नहीं रख पा रहा है। यहां रोडवेज बस स्टैंड पर माताएं अपने लाड़लों को आंचल में छिपाकर खुले में लजाते हुए स्तनपान कराने को मजबूर हैं। कारण, प्रबंधन की लापरवाही से वात्सलय (शिशु स्तनपान कक्ष) बदहाली के आंसू बहा रहा है। कक्ष को स्मैकचियों ने अड्डा बना लिया है, तो आस-पास पशु डेरा डाले बैठे हैं।
मां के दर्द को समझा, संस्था आगे आई
यात्री महिला के दर्द को समझते हुए महावीर इंटरनेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट ने बस स्टैण्ड में प्लेटफार्म पर वात्सलय नाम से कक्ष बनवाया था, ताकि इसमें माताएं बिना हिचकिचाहट शिशुओं स्तनपान करवा सकें।
भूले देखरेख, अब लजा रही ममता
कक्ष की देखरेख आगार प्रबंधन को करनी थी, लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। हालात ये हैं कि कक्ष के दरवाजे टूट चुके हैं और यह जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गया है। इसमें समाजकंटक बैठकर स्मैक पीते हैं। आसपास मवेशी डेरा डाले रहते हैं।
इनका कहना है
यही सही है कि वात्सलय की हालत खराब हो गई है। इस ठीक करवाया जाएगा।
ओमप्रकाश चेचाणी, मुख्य आगार प्रबंधक, भीलवाड़ा





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