पाली। पाली सैंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक ऋण घोटाले में जांच अधिकारी ने बैंक अध्यक्ष के साथ ही डायरेक्टर, एमडी व बैंक कार्मिकों को दोषी मानते हुए अपनी रिपोर्ट रजिस्ट्रार नीरज के पवन को सौंप दी है। इसमें 21 कार्मिकों को दोषी मानते हुए 4.54 करोड़ रुपए वसूलने की अनुशंसा की है। इसके तहत बैंक अध्यक्ष, डायरेक्टर व एमडी से 51-51 लाख रुपए वसूले जाएंगे।
सहकारिता विभाग के सीनियर एडिशनल रजिस्ट्रार जोधपुर अनिल मेहता की ओर से सोसायटी एक्ट के तहत की गई जांच में सामने आया कि दोषी बैंक अधिकारियों के कारण बैंक का एनपीए 10 प्रतिशत से बढकऱ 40 प्रतिशत तक हो गया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट रजिस्ट्रार नीरज के. पवन को सौंप दी है। यह राशि वसूल नहीं होने की स्थिति में उनके खिलाफ अपराधिक मामला तक दर्ज करवाया जा सकता है।
किनसे कितनी होगी वसूलीपीसीसीबी बैंक अध्यक्ष पुष्पेन्द्रसिंह कुडक़ी से 51.85 लाख, बैंक डायरेक्टर गणपतसिंह उतवण से 51.85 लाख, पूर्व एमडी भवानीसिंह कविया से 51.21 लाख, पूर्व एमडी योगेश पाठक से 63.88 लाख, ब्रांच मैनेजर अभिषेक सांदू से 18.87 लाख, पूर्व ब्रांच मैनेजर अशोक गौड़ से 30.4 लाख, पूर्व ब्रांच मैनेजर नारायण जोशी से 36.98 लाख, पूर्व शाखा प्रबंधक मोतीलाल से 25.4 लाख, प्रबंधक अग्रिम धर्मवीर से 5.87 लाख, प्रबंधक अग्रिम अतुल पुरोहित से 37.49 लाख, प्रबंधक अग्रिम मनीष व्यास से 24.14 लाख, वरिष्ठ प्रबंधक अग्रिम रामचंद्र दायमा से 33 हजार, बैंकिंग सहायक ऋण अनुभाग ब्रिजेश भदोरिया से 40.54 लाख, बैंकिंग सहायक अशोक मगतानी से 8.20 लाख, बैंकिंग सहायक जितेन्द्रनाथ से 65 हजार 500 रुपए, शाखा प्रबंधक व एफआइआर रिपोर्टकर्ता हाजी मोहम्मद से 5.22 लाख, एफआइआर रिपोर्टकर्ता देवीसिंह राठौड़ से एक लाख रुपए, बाबूलाल राठौड़ से 2.20 लाख, रामचंद्र गहलोत से 7.29 लाख, नरपतराज से 96 हजार, जगदीश पारीख से 12 हजार की राशि वसूल की जाएगी।
यह है मामला
दरअसल, 11 लाख रुपए में भूखण्ड सहित मकान बनाकर देने का झांसा देकर बैंक एजेंट भरत पालीवाल ने 12 से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाया। उनके ऋण स्वीकृत करवा लिए, जबकि दो के तो दस्तावेज तक नहीं थे। इतना ही नहीं, उनसे चेक लेकर बैेंक अधिकारियों से मिलीभगत कर राशि भी उठा ली। जब ठगे जाने का एहसास हुआ तो पीडि़तों ने बैंक एजेंट भरत पालीवाल सहित बैंक के चार-पांच कार्मिकों के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज करवाया। इस पर एजेंट भरत गायब हो गया। जिसे कोतवाली पुलिस अभी तक नहीं ढूढ़ सकी है। इधर, मामला उजागर होने पर सहकारिता विभाग जोधपुर के सीनियर एडिशनल रजिस्ट्रार अनिल मेहता ने राजस्थान को-ऑपरेटिव सोसायटी एक्ट की धारा 55 के तहत 63 ऋण पत्रावलियों की जांच शुरू कर दी, जिसमें 21 बैंककर्मियों को दोषी ठहराया। इधर, रजिस्ट्रार नीरज के पवन के निर्देश पर उप रजिस्ट्रार शुभम जैन ने भी जांच शुरू की, जिसमें भी खुलासा हुआ कि मकान बनाने से पूर्व ही बिना जांच पड़ताल के ऋण जारी कर दिए गए।
उच्चाधिकारी करेंगे आगे की कार्रवाई
पीसीसीबी ऋण घोटाले की जांच में 21 बैंककर्मियों को वित्तीय अनियमितता का दोषी माना है। बैंक अध्यक्ष, डायरेक्टर सहित सभी 21 बैंककर्मियों से राशि वसूली जाएगी। इस राशि का निर्धारण कर रिपोर्ट सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार जयपुर को सौंप दी है। आगे की कार्रवाई वे ही करेंगे।
- अनिल मेहता, सीनियर एडिशनल रजिस्ट्रार, सहकारिता विभाग जोधपुर





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