उदयपुर/ फलासिया. चिकित्सा विभाग में 'चहेतोंÓ को अनुकूल जगह पर प्रतिनियुक्ति देने वाली नीतियां ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए 'गंभीर बीमारीÓ बनकर उभर रही है। उदयपुर जिले की पंचायत समिति फलासिया के कोल्यारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बात करें तो यहां बीते एक साल से ग्रामीणों का स्वास्थ्य एवजी (प्रतिनियुक्ति) चिकित्सक के भरोसे है। झाड़ोल के ओगणा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नियुक्त चिकित्सक डॉ. काजी फेजान को प्रतिनियुक्ति के तौर पर बीते एक साल से कोल्यारी में लगाया हुआ है। कोल्यारी में स्वीकृत दो चिकित्सक पदों पर 7 अक्टूबर 2018 को डॉ. वर्दीचंद कटारा की जोइनिंग भी हुई, लेकिन तुरंत ही विभाग ने व्यवस्था के नाम पर उन्हें झाड़ोल सीएचसी पर प्रतिनियुक्ति दे दी थी। चिकित्सकों की कमी के बीच डॉ. कटारा को झाड़ोल सीएचसी का प्रभारी बनाया गया, लेकिन मरीजों की शिकायतों एवं सीएचसी में मिली खामियों के बीच सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने डॉ. कटारा को एपीओ कर दिया था।
बीमारी में चक्कर!
राजकीय योजनाओं और अन्य कारणों के चलते पीएचसी कोल्यारी के एक मात्र चिकित्सक को मुख्यालय में होने वाली बैठकों में रहना होता है तो कभी निजी कार्य से बाहर जाना पड़ता है। ऐसे में चिकित्सालय आने वाले मरीजों को उपचार के नाम पर कई चक्कर काटने होते हैं। मजबूरी में गरीब तबका क्षेत्र के झोलाछाप चिकित्सकों की शरण में चला जाता है। मनमानी भरे उपचार के साथ झोलाछाप गरीबों से औने-पौने दाम वसूलते हैं।
निरंतर गिर रहा ग्राफ
बीते वर्ष के दौरान रही उपलब्धियों पर नजर डाले तो बढ़ती जनसंख्या के बीच कोल्यारी पीएचसी में आईपीडी, ओपीडी व प्रसव के आंकड़ों का ग्राफ निरंतर नीचे गिर रहा है। चिकित्सक की अनुपस्थिति एवं कमी के बीच गर्भवती महिलाओं को भी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। खास समस्या तब आती है, जब रात के समय गर्भवती महिलाएं जोड़-तोड़ कर पीएचसी तक पहुंच जाती हैं, लेकिन उन्हें मौके पर चिकित्सक नहीं मिलता। मायूस परिजनों को मजबूरी में 20 से 30 किलोमीटर दूर स्थित फलासिया या झाड़ोल सीएचसी को रूख करना होता है।
कहते हैं आंकड़े
माह ...2018.... 2019
ओपीडी... आईपीडी... प्रसव... ओपीडी... आईपीडी... प्रसव
जनवरी 1287... 35... 17... 1230.... 28...13
फरवरी 1018... 18... 6... 1096... 21... 11
मार्च 952... 32... 16...1091... 27... 18
अप्रेल 1248... 27... 16... 1021... 20.... 11
मेरी भी मजबूरी
क्या करें अकेला चिकित्सक हूं। निजी व सरकारी कामकाज को लेकर कई बार बाहर आना जाना होता है, हालांकि जाते समय वैकल्पिक व्यवस्था करके जाता हूं। मेरा मूल पदस्थापन तो ओगणा है। पिछले 23 जून 2018 से डेपूटेशन पर हूं।
डॉ. काजी फेजान, चिकित्सक, कोल्यारी पीएचसी





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