शैलेन्द्र अग्रवाल / जयपुर। समाज को शर्मसार कर देने वाली बलात्कार जैसी घटनाओं पर पुलिस का रवैया अलग-अलग है। मई के अंत में प्रदेश में जांच में लम्बित सामूहिक बलात्कार के दो माह से अधिक पुराने मामलों की संख्या 113 थी, वहीं मई में राजनीतिक मुद्दा बने अलवर जिले के थानागाजी में सामूहिक बलात्कार के मामले में पुलिस ने 15 दिन में चालान पेश कर दिया और सरकार ने पीड़िता को पुलिस में नौकरी देने की घोषणा कर दी।
31 मई को जांच अधूरी होने के कारण लंबित सामूहिक बलात्कार के 180 मामले अप्रेल—मई माह में दर्ज हुए थे। पिछले डेढ़ माह में दर्ज नाबालिग से सामूहिक बलात्कार के 10 मामलों में भी चालान पेश नहीं हुआ, इनमें से असम की एक नाबालिग को तो बलात्कार से पहले दो बार बेचा गया। इस बीच पुलिस कार्रवाई के दौरान मौत और सामूहिक बलात्कार के एक- एक मामले में नौकरी की घोषणा और सामूहिक बलात्कार के बाकी मामलों में पीडि़ताओं के लिए ऐसी घोषणा नहीं होने को भेदभाव मानते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की है।
राजस्थान पत्रिका ने प्रदेशभर में चालान के इंतजार में अटके बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की घटनाओं को लेकर पड़ताल की तो चौंकाने वाला सच उजागर हुआ, पुलिस ने घटना की गंभीरता के बजाय राजनेताओं के आंदोलन को ठंडा करने के लिए कार्रवाई में फुर्ती दिखाई। मई—जून में तो कई मामले ऐसे भी सामने आए, जिनमें अपराधियों ने सामूहिक बलात्कार के बाद ब्लेकमेलिंग के लिए मोबाइल से पीड़िता के अश्लील वीडियो भी बना लिए। कुछ मामलों में वीडियो वायरल हुए, तब पुलिस की आंख खुली। मई— जून में सामूहिक बलात्कार के कुछ झूठे मामले भी दर्ज होने की जानकारी सामने आई, लेकिन पुलिस ने इनमें भी एफआर देकर पीछा छुडा लिया। झूठा मामला दर्ज कराने वालों पर कार्रवाई के लिए कोर्ट से आग्रह तक नहीं किया।
चालान ही पेश नहीं, सजा कहां से मिलेगी
पड़ताल के दौरान जानकारी मिली कि पुलिस ने उन मामलों में तो चालान पेश करने में जल्दबाजी की, जिनमें आंदोलन हुए या राजनेताओं ने आवाज उठाई। बाकी मामलों में पुलिस जांच अधूरी ही है।
33 में से 14 जिले कलंक से बचे
डेढ़ माह के दौरान टोंक, चित्तौडगढ़़, सिरोही, जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर, राजसमंद, बूंदी, जोधपुर, उदयपुर, धौलपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर व बारां जिले ही ऐसे रहे, जिनमें सामूहिक बलात्कार की घटना सामने नहीं आई।
झालावाड़ और दौसा के मामले बताए जा रहे झूठे
पुलिस ने झालावाड़ जिले में दर्ज सामूहिक बलात्कार की घटना की शिकायत को झूठा बताया है। पुलिस के अनुसार पारिवारिक झगड़े के कारण झूठा मामला दर्ज कराया गया। इसी तरह दौसा जिले के बांदीकुई में सामूहिक बलात्कार के मामले में भी पुलिस ने एफआर लगा दी है।
31 मई को बलात्कार के मामलों की स्थिति
प्रदेश में कुल लम्बित मामले —1000 से अधिक
दो माह से अधिक पुराने मामले—349
2 माह से कम पुराने मामले—721
राजनीतिक दखल से अनुसंधान पर असर
महिला अपराध के मामलों में राजनेताओं और उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के कारण सही अनुसंधान नहीं हो रहा है। कोर्ट में आधे-अधूरे साक्ष्यों के साथ चालान पेश होने से अपराधी बच निकलते हैं। होना तो यह चाहिए कि चालान में अगर कमी रहती है तो चालान पेश करने का आदेश देने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
-ओमप्रकाश, अधिवक्ता व सेवानिवृत्त आरपीएस अधिकारी
दो माह के भीतर चालान पेश करने की पॉलिसी
बलात्कार के मामलों में दो माह के भीतर चालान पेश करने की पॉलिसी है। पोक्सो एक्ट के मामलों में इसका कानूनी प्रावधान है। पुलिस इसी दायरे में चालान पेश करने का प्रयास करती है।
- कपिल गर्ग पुलिस महानिदेशक





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