मसूदा (अजमेर). मसूदा क्षेत्र की जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। कस्बे में संचालित क्षेत्र का सबसे बड़ा सामुदायिक चिकित्सालय अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। आमजनों के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए बना अस्पताल नाममात्र दिखावा बनकर रह गया है।
कस्बे और आसपास क्षेत्र की जनता को प्राथमिक उपचार भी बराबर नहीं मिल पा रहा है। लंबे समय से मसूदा अस्पताल स्टाफ की कमी और उचित संसाधन की कमी का दंश झेल रहा है। लोगों को प्राथमिक उपचार के नाम पर ब्यावर रैफर कर दिया जाता है। कई बार मरीज के गंभीर घायल होने पर ब्यावर अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो जाती है।
अस्पताल में स्टाफ की काफी कमी है। यहां उधार के डॉक्टरों को लाकर अस्पताल चलाया जा रहा है। रविवार के हालात यह थे कि उधार के डॉक्टरों की हिम्मत भी जवाब देती नजर आई। डॉ. लोकेश कुमावत ने कहा कि उनको इस हालात में नौकरी करने से त्यागपत्र भेजना उचित लग रहा है। चिकित्सालय में नर्सिंग स्टाफ लंबे समय से काफी कम है।
कहने को दो-दो नि:शुल्क दवा वितरण केंद्र हैं, लेकिन उसके दोनों फार्मासिस्ट का ट्रांसफर हो चुका है। जिससे दवा वितरण में परेशानी हो रही है। चिकित्सालय के हालात यह है कि मरीजों को दवा देने के लिए चिकित्सकों को चेयर से उठकर दवा देनी पड़ रही है। चिकित्सक दुर्गा दत्त ने बताया कि जैसे-तैसे चिकित्सालय की व्यवस्था बनाने का प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन कब तक।
जिला चिकित्सा अधिकारी केके सोनी ने बताया कि कुछ अवस्थाएं हो रही हैं, जिनको दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। नया स्टाफ आते ही मसूदा चिकित्सालय में लगाया जाएगा।





No comments:
Post a Comment