बालोतरा. हाइवे मूंगड़ा सर्किल से रामसीन- मूंगड़ा तक चार किलोमीटर अधूरे सड़क निर्माण कार्य पर एक दर्जन गांवों के हजारों लोग राहत को तरस गए हैं। ठेकेदार के एक माह पूर्व ग्रेवल सड़क बना दुबारा इस ओर नहीं झांकने पर अधूरे कार्य को लेकर आवागमन में हर दिन राहगीरों, वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ती है। टूटी ग्रेवल सड़क पर बिखरी कंक्रीट से वाहन रपटते हैं। इससे चालक, सवार चोटिल होते हैं।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के द्वितीय चरण में कुछ समय पूर्व में मंूगड़ा- उमरलाई 15 किलोमीटर सड़क स्वीकृत की गई थी। 4 करोड़ राशि से स्वीकृत इस सड़क का टेण्डर कम राशि में स्वीकृत होने पर सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशेष राशि को लेकर उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा। इस पर हाइवे मूंगड़ा सर्किल-गांव रामसीन-मूंगड़ा तक 4 किलोमीटर सड़क स्वीकृत की गई। स्वीकृत सड़क पर करीब चार माह पूर्व ठेकेदार ने निर्माण कार्य शुरू किया, लेकिन अभी तक यह कार्य पूरा नहीं हुआ है। इस पर राहगीरों, वाहन चालकों का सुख-चैन छीन गया है।
धंसने वाहन, उड़ती रेत - ठेकेदार ने पहले मार्ग सड़क की खुदाई कर व मिट्टी डाल एक-डेढ़ माह तक आगे का कार्य नहीं किया। रेत में वाहनों के धंसने, इसके उडऩे से राहगीरों, वाहन चालकों को अधिक परेशानी उठानी पड़ी। आमजन की शिकायतों पर ठेकेदार ने इसके बाद ग्रेवल सड़क बनाई, लेकिन डामर नहीं किया। एक माह से अधिक पहले बनाई सड़क वाहनों की आवाजाही से जगह-जगह से टूट गई है। बाहर निकली कंक्रीट से वाहन रपटते हैं। इनके टायर फटते हैं। तेज गति से भागते वाहनों से उछलने वाले कंकरों से राहगीर चोटिल होते हैं। इस पर इस सड़क से जुड़े गांव रामसीन, मंूगड़ा, भाण्डियावास,ढण्ड, उमरलाई, कांकराला आदि के ग्रामीणों, वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है।
चार माह से कार्य अधूरा, परेशानी - नाममात्र 4 किलोमीटर दूरी की सड़क चार माह में नहीं बनना, घोर लापरवाही होना दर्शाता है। मार्ग से गुजरना मुश्किल हो गया है। हर दिन हजारों जने परेशानी उठाते हैं। विभागीय अधिकारी इसे गंभीरता से लेते हुए अधूरा कार्य शीघ्र पूरा करवाएं। - मोहनलाल पालीवाल, रामसीन
वाहन रपटने से सवार होते चोटिल- सड़क निर्माण कार्य जब से शुरू हुआ है, तब से परेशानियां उठा रहे हैं। टूटे ग्रेवल पर बिखरी कंक्रीट से वाहन रपटने से चालक, सवार चोटिल होते हैं। टायर कटते, फटते हैं। विभाग शीघ्र डामर करवाएं। इससे की आमजन को राहत मिले। - विशनाराम प्रजापत





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