योग एक ऐसी प्राचीन पद्धति जो व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ देती है, उसे जीवन जीने का एक नया तरीका सिखाती है, लेकिन कस्बे में एक व्यक्ति ऐसा भी है योग ने जिसके जीवन की राह ही बदल दी।
ये व्यक्ति हैं हैं कस्बे के दयाराम जाखड़। जाखड़ बताते हैं कि मार्च 2009 में उनकी पत्नी के गले में ट्यूमर हो गया। बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल में चिकित्सकों ने इसे कैंसर घोषित कर दिया तथा सर्जरी की सलाह दी। ऐसी गंभीर बीमारी होने से पत्नी परेशान थी।
इसी दौरान जाखड़ ने टीवी पर योग से कैंसर के निदान के बारे में जाना। इसके बाद इन लोगों ने योग और आयुर्वेदिक उपचार का सहारा लिया। पति पत्नी दोनों नियमित योगाभ्यास करने लगे। धीरे धीरे जाखड़ की पत्नी के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा।
आठ माह निरंतर योगाभ्यास के बाद जाखड़ की पत्नी के गले के ट्यूमर का साइज कम होने लगा। कैंसर की गांठ जब बिल्कुल कम रह गई तो उन्होंने नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में जांच करवाई । जांच के बाद गाठ में कैंसर के बैक्टीरिया नहीं मिलने पर चिकित्सकों को ट्यूमर हटाने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने ट्यूमर हटवा दिया तथा योगाभ्यास जारी रखा। जाखड़ ने बताया कि उन्होंने प्रतिवर्ष पत्नी के स्वास्थ्य की जांच करवाई लेकिन कभी कोई समस्या नही आई। इसके अलावा माइग्रेन, गैंस अनिद्रा जैसी बीमारियां भी ठीक हो गई।
पत्नी का स्वास्थ्य सुधरा तो योग प्रशिक्षक बनने की ठानी
जाखड़ बताते हैं कि जब योग से उनकी पत्नी का स्वास्थ्य ठीक हुआ तो उन्होंने ठान लिया कि वे योग प्रशिक्षक बनकर लोगों को योग के जरिए रोग मुक्त करेंगे। इसके बाद से वे योग का प्रशिक्षण लेकर अनूपगढ के पब्लिक पार्क में योग करवाने लगे।
कर रहे हैं लोगों को स्वस्थ्य
गांव तीन पी निवासी राजेश बिश्नोई बताया कि वे तीन वर्ष से शरीर के बाएं हिस्से में दर्द से परेशान थे। उन्होंने इस रोग के उपचार के लिए कई जगह जांचें करवाई और चिकित्सकों से संपर्क साधा। योग प्रशिक्षक जाखड़ के सान्निध्य में उन्हें इस रोग से मुक्ति मिली।





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