पाली. कपड़ा उद्यमी मासूम दिलों को तेजाबी जख्म दे रहे हैं। नियमों के विरुद्ध फैक्ट्रियों का रासायनिक अपशिष्ट डंपिंग यार्ड में डाला जा रहा है। यार्ड के निकट की बस्तियों के एक दर्जन से अधिक बच्चों के पैर झुलस गए हैं। उनके पैरों में फफोले हो गए हैं। तीन बच्चों का सरकारी अस्पताल में उपचार चल रहा है, जबकि कई बच्चे घरों में ही पीड़ा झेलने को विवश हैं।
मामला आन्नद नगर स्थित औद्योगिक क्षेत्र नम्बर एक का है। जहां फैक्ट्रियों के लिए रीको ने एक डम्पिंग यार्ड बना रखा है ताकि वे संस्थान का कचरा डाल सकें, लेकिन उद्यमी तेजाबी कचरा यहां फैंक रहे हैं। यही कचरा क्षेत्र के लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। यार्ड के निकट आवासीय बस्ती है। बच्चे खेलते-खेलते यार्ड में पहुंच जाते हैं। कई बच्चे कचरे में सामान तलाशने भी पहुंच जाते हैं। यार्ड की दीवार टूटी हुई है। क्षेत्र में ज्यादातर कमजोर तबके के परिवार निवास करते हैं।
नहीं डाला जा सकता तेजाबी कचरा
डम्पिंग यार्ड संस्थान का कचरा डालने के लिए बनाया गया है। तेजाबी कचरा यहां कोई नहीं डाल सकता। यदि एेसा हो रहा है तो यह नियमों का उल्लंघन है। डम्पिंग यार्ड ही बंद करवा दूंगा। एेसा किसी सूरत में नहीं होना चाहिए।
ए.के.सक्सेना, क्षेत्रीय प्रबंधक रीको
कई मवेशी हुए घायल
तेजाबी अपशिष्ट से बच्चे ही नहीं, मवेशियों को भी जख्म मिला है। एक दर्जन से अधिक मवेशियों को पैर झुलस चुके हैं। स्थानीय लोगों ने घायल पशुओं को पिंजरापोल गोशाला भेजा है। उद्यमियों को तेजाबी कचरा फैंकने का मना भी किया, लेकिन कोई उद्यमी मान नहीं रहा।
गोपाल पंवार, पार्षद आन्नद नगर।
कई बार लगती है आग
तेजाबी कचरे में आग लगती रहती है। धुएं और बदबू से परेशान है। आग बुझाने के लिए दमकल को भी कई बार बुलाना पड़ता है। लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। तेजाबी कचरे की समस्या से निजात नहीं मिल रही। उद्यमियों को भी मना किया। फिर भी हालात वही है।
कमरूद्दीन, क्षेत्रवासी
इलाज के पैसे नहीं
मेरे बच्चे के पैर झुलस गए। अभी वो चल नहीं सकता है। बच्चे का इलाज कराने के पैसे नहीं है। मोहल्ले में कुछ और भी बच्चे है जिनके पैर डंपिंग यार्ड के तेजाबी कचरे से झुलस गए। पैरों में फफोले हो गए। बच्चे पीड़ा से कराह रहे हैं। यह परेशानी बढ़ रही है। इसके बावजूद कोई ध्यान नहीं दे रहा।
कमला देवी, क्षेत्रवासी





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