उदयपुर/ सलूंबर. उदयपुर जिले में भ्रष्टाचार का पर्याय बन रही मनरेगा योजना में एक नया 'फर्जीवाड़ाÓ सामने आया है। अपना खेत अपना काम समतलीकरण योजना के नाम पर सेमारी पंचायत समिति के सल्लाड़ा गांव में हुए भ्रष्टाचार की पोल का खुलासा किसान के खाते में आए मोबाइल संदेश से हुआ। संदेश की पड़ताल में जुटे सल्लाड़ा निवासी गोपालसिंह पुत्र वगतसिंह राजपूत को पता चला कि खाते में आई संबंधित राशि उसकी और उसकी पत्नी की ओर से खेत में की गई ऐसी मजदूरी के हैं, जो कभी उन्होंने की ही नहीं। एक के बाद एक कर खुली परतों में सामने आया कि योजना के नाम पर किसान से धोखाधड़ी हुई है। भौतिकता में खेत पर समतलीकरण की बजाए जिम्मेदारों ने केवल दस्तावेज में काम पूरा होना बताकर हजारों रुपए की मजदूरी राशि लोगों के खातों में भुगतान कर दी। खास तो यह है कि हमेशा की तरह जिला परिषद प्रशासन की ओर से इस बार भी फर्जीवाड़े की जांच कर संबंधित राशि की वसूली करने आश्वासन दिया गया है।
यह है मामला
सेमारी पंचायत समिति के सल्लाड़ा निवासी किसान गोपालसिंह के आवेदन पर उसका चयन अपना खेत अपना काम समतलीकरण केटल सेट वर्मी कंपोज्ड के लिए हुआ। योजना के तहत उसे एक लाख 40 हजार स्वीकृत हुए। इसमें 61 हजार निर्माण सामग्री व 79 हजार रुपए मजदूरी के थे। लेकिन, मंजूरी के बावजूद आवेदक को इस स्वीकृति की सूचना नहीं दी गई। बाद में बिना समतलीकरण के 5 मस्टररोल भरकर पंचायत समिति में जमा कराकर संबंधित मजदूरी राशि का खातों में बंटवारा हो गया। इससे पहले किसान के खाते में 13 दिन और पत्नी की 25 दिन की मजदूरी के हिसाब से 4920 रुपए खाते में डाले गए। स्थिति यह है कि प्रार्थी की शिकायत पर कार्रवाई की बजाए किसी ने उसे बिना जानकारी दिए 55 हजार रुपए लोगों में बांट दिए।
फर्जी मस्टररोल की कहानी
पंचायत समिति के रेकॉर्ड के हिसाब से पहला मस्टररोल १६ फरवरी को ४५०८५ नंबर से जारी हुआ। इसी तरह दूसरा १ मार्च को ४९६०८ से जारी हुआ। तीसरा मस्टर रोल १६ से ३१ मार्च के बीच ५०८४३ नंबर, चौथा एक अप्रेल से १५ अप्रेल के बीच मस्टररोल नंबर ७०९६ से जारी हुआ। वहीं १६ जून से दूसरा पखवाड़ा दस्तावेज में चल रहा है।
कागज में मस्टररोल कार्य
मेरे नाम से समतलीकरण स्वीकृत हुआ। दस्तावेज में खानापूर्ति कर कार्य का भुगतान उठा लिया गया, जबकि मेरे खेत में कोई काम नहीं हुआ। गोपाल सिंह, पीडि़त आवेदक
जांच कराएंगे, होगी कार्रवाई
पूरे मामले में जांच दल भेजकर जांच कराएंगे। दोषी लोगों से वसूली सुनिश्चित की जाएगी।
कमर चौधरी, जिला कार्यकारी अधिकारी, उदयपुर





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