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DFCC- अब अलग ट्रेक पर सरपट दौड़ेंगी मालगाडि़यां

सुरेश लालवानी. अजमेर.

देश में यात्री गाडि़यों के संचालन में बाधा बन रही मालगाडि़यां अब अलग से बन रहे नए रेलवे टे्रक पर सरपट दौड़ती नजर आएगी। लगभग 50 हजार करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉकिडोर परियोजना अंतिम चरण में है। नए ट्रेक के अस्तित्व में आने के बाद मौजूदा रेलवे लाइन से मालगाडि़यां हट जाएगी। संभवत: इसी साल के अंत तक नए रेलवे ट्रेक पर डबल डेकर मालगाडि़यां चलना प्रारंभ हो जाएगी।

दिल्ली से मुम्बई के बीच लगभग 1500 किलोमीटर लंबी वेस्टर्न डीएफसीसी पर पिछले 14 वर्ष से कार्य चल रहा है। इसके तहत विद्युतीकृत हाइस्पीड दोहरा रेलवे ट्रेक बिछाया जा रहा है। इस मार्ग पर सिर्फ डबल डेकर मालगाडि़यां चलाई जानी हैं। यह ट्रेक मौजूदा रेलवे लाइन के समानांतर बिछाया जा रहा है। नई लाइन के लिए भूमि अवाप्ति प्रक्रिया को अदालत में चुनौती सहित अन्य कारणों की वजह से अब तक अटक अटक कर चली आ रही यह परियोजना अब अंतिम चरण तक पहुंच चुकी है।

पांच राज्यों से होकर गुजरेगी लाइन

वेस्टर्न डीएफसीसी देश के पांच राज्यों से होकर गुजर रही है। दिल्ली के दादरी से लेकर मुम्बई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट स्टेशन के बीच यह लाइन उत्तरप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कई स्टेशन इसकी जद में हैं। यह रेलवे लाइन वडोदरा, अहमदाबाद, मेहसाना, पालनपुर, अजमेर, फुलेरा और रेवाड़ी होकर गुजरेगी।


निर्माण से लेकर संचालन का अधिकार जापान को

पश्चिमी मालभाड़ा समर्पित इस गलियारे के लिए वित्तीय सहायता जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जाइका) ने दी है। वित्तीय सहायता की शर्तों के मुताबिक इस ट्रेक के निर्माण का जिम्मा भी जापानी कंपनियों को दिया गया। लाइन बिछाने के लिए रेलवे पटरी सहित अन्य इंजीनियरिंग सामग्री भी जापान से मंगवाई गई थी। यही नहीं यह रेलवे लाइन जापानी अधिकारियों की देखरेख में बिछाई जा रही है। शर्तों के तहत डीएफसीसी के संचालन का अधिकार भी जापानी कंपनी को मिलेगा।

31 आरओबी और 262 आरयूबी

मालगाडि़योंं के लिए बिछाई जा रही इस रेलवे लाइन के बीच कोई भी समपार फाटक नहीं है। इस रेल मार्ग पर सिर्फ आरओबी और आरयूबी बनाए गए हैं। दरअसल मालगाडि़यों के लिए अलग से बिछाए जा रहे ट्रेक पर रोजाना 200 मालगाडि़यां सरपट दौड़ती नजर आएगी। तकरीबन पांच मिनट के अंतराल में गुजरने वाली मालगाडि़यों के लिए फाटक बंद करने और खोलने का समय नहीं रहेगा। रेवाड़ी से पालनपुर के बीच 31आरओबी और 262 आरयूबी का निमार्ण किया गया है।

उजाड़ी कई आवासीय कॉलोनियां भी

दरअसल विकास की पटरी के लिए लाइन की जद में आ रही अनेक आवासीय कॉलोनियों को भी उजाड़ दिया गया। मालगाडि़यों के लिए नया रेलवे ट्रेक मौजूदा रेलवे लाइन के समानांतर बिछाया गया है। इसके लिए रेलवे लाइन के आसपास बसी शहरी कॉलोनियों के मकानों को अवाप्त किया गया। अवाप्ति प्रक्रिया को लेकर अनेक मामले न्यायालय तक भी पहुचे। मुआवजा बाजार दर से देने के बजाए डीएलसी दर से तय करने की वजह से डीएफसीसी को विरोध का सामना करना पड़ा। अकेले अजमेर मंडल में ही लगभग 500 मकान और भूखंड अवाप्त किए गए। प्रभावित परिवारों के विरोध के बावजूद अंतत उनकी जीवनभर की पूंजी से बनाए गए पक्के मकानों पर बुलडोजर चलाकर धाराशायी कर दिया गया।

फैक्ट फाइल

-रेलवे ट्रेक की लंबाई- 1500 किमी

-अनुमानत लागत- 50 हजार करोड़ रुपए

-रेल मार्ग के बीच स्टेशन- 45

-रोजाना चलेगी मालगाडि़यां- 200

-रेवाड़ी से पालनपुर के बीच आरओबी- 31, आरयूबी 262

 



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