बेदम सरकारी योजनाएं कॉलेज में युवाओं को फायदा पहुंचाती नहीं दिख रही हैं। साल दर साल कई प्रयोग हुए लेकिन युवाओं ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी। काफी हद तक कॉलेज भी इसके जिम्मेदार हैं। उनकी उदासीनता के चलते कई अहम योजनाएं फेल हो चुकी हैं।
कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने निजी अथवा सरकारी नौकरी, व्यवसाय और विभिन्न कारणों से पढ़ाई से वंचित विद्यार्थियों को नियमित प्रवेश देकर पढ़ाने की योजना बनाई थी। अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय सहित, कोटा, जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, बीकानेर और उदयपुर संभाग मुख्यालय के कॉलेज में सेल्फ फाइनेंसिंग योजनान्तर्गत शाम को 5 से रात्रि 9 बजे तक सायंकालीन कक्षाएं देना तय हुआ। सेल्फ फाइनेंसिंग योजना में कॉलेज फीस के अतिरिक्त 10 हजार रुपए अतिरिक्त रखे गए। विद्यार्थियों ने भारी-भरकम फीस देखकर कदम ही नहीं बढ़ाए। कॉलेज और सरकार ने भी इसके लिए दोबारा प्रयास नहीं किए।
कोर्स में ज्यादा नहीं रुचि
उद्यमिता एवं कौशल विकास पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने में भी कॉलेज पीछे हैं। सरकार ने सभी सरकारी कॉलेज में उद्यमिता और कौशल विकास पाठ्यक्रम प्रारंभ किए थे। अधिकांश कॉलेज पर्याप्त प्रवेश में नाकाम रहे हैं। इनमें एडवांस सर्टिफिकेट इन इन्फॉरमेशन सिक्योरिटी, सर्टिफिकेट इन आईटी, सर्टिफिकेट इन फूड एन्ड न्यूट्रिशियन, सर्टिफिकेट इन टूरिज्म स्टडीज, सर्टिफिकेट इन फूड सेफ्टी, सर्टिफिकेट इन ऑर्गेनिक फार्मिंग, डिप्लोमा इन बिजनेस प्रोसेस ऑउटसोर्सिंग और अन्य शामिल हैं।
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चौपट हुआ कैट पाठ्यक्रम
उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट (तब केंद्रीय वाणिज्य राज्यममंत्री) की पहल पर 2013-14 में सभी कॉलेज में कैट पाठ्यक्रम शुरू किया गया। इसके तहत विद्यार्थियों को एकाउंट्स और मैनेजमेंट क्षेत्र में रोजगार मिल सकता है। लेकिन 2013 से दिसंबर 2018 तक रही तत्कालीन सरकार ने इसे तवज्जो नहीं दी। इसके चलते कोर्स चौपट हो गया।
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पहले भी कई योजनाएं फेल
-75 फीसदी से ज्यादा उपस्थिति पर परीक्षा में 5 अतिरिक्त अंक
-सभी कॉलेज में मिलिट्री साइंस पाठ्यक्रम की शुरुआत
-रक्तदान करने पर 5 अतिरिक्त उपस्थिति का लाभ
-कैट और लघु सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों की शुरुआत
-इंग्लिश स्पोकन लैब और जेनपेक्ट सेंटर
-कॉलेज में हाइटेक कम्प्यूटर लेब और फैसेलिटी सेंटर





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