राजीव दवे . पाली. इन्द्र देव पिछले वर्ष रूठे थे, जो अभी तक माने नहीं है। उनकी बेरुखी के कारण पश्चिमी राजस्थान के मरुसागर (जवाई बांध) का जल लगातार रसातल की ओर से जा रहा है। उसके डेड स्टोरेज के पानी को काम लेने के लिए शेड बनाने और पाइप लगाने का कार्य शुरू किया जा चुका है। इधर, जिले में जल संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में अब जलदाय विभाग के पास एक ही विकल्प बचा है, वह है रेलगाड़ी से पानी का परिवहन करना। इसके लिए विभाग की ओर से 13 करोड़ रुपए का प्रपोजल बनाया गया है। जिसे स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा गया है। वहां से हरी झण्डी मिलने के बाद जोधपुर के भगत की कोठी रेलवे स्टेशन से पाली तक पानी परिवहन करने की तरफ कदम बढ़ाया जाएगा।
रकम मिलने पर शुरू होगा कार्य
जोधपुर से रेल के वेगनों में पानी भरकर पाली पानी लाने के लिए भगत की कोठी रेलवे स्टेशन तय है। वहां से वेगनों में पानी भरने के बाद रेल पाली आएगी। जो जोधपुर रोड स्थित जलदाय विभाग के कार्यालय के पीछे बनी हौदियों में खाली होगी और वहां से पानी एक बड़े हौद में एकत्रित कर शहर में सप्लाई किया जाएगा। अब वित्त मंत्रालय से स्वीकृति मिलने पर रेलवे ट्रेक के पास बनी हौदियों की सफाई व मरम्मत का कार्य शुरू करवाया जाएगा।
बड़ी रकम लेगा रेलवे
जोधपुर से पाली तक पानी का परिवहन करने के लिए रेलवे को बड़ी रकम अदा करनी होगी। जलदाय विभाग के अधिकारियों की माने तो इसके लिए रेलवे को 12 करोड़ रुपए देने होंगे। इस राशि से रेलवे रोजाना रेलगाड़ी के चार फेरे से पाली पानी लाएगा। यह राशि 47 दिन तक पानी परिवहन के लिए तय की गई है। इसके बाद भी बरसात नहीं होने पर पानी के लिए अधिक रकम की जरूरत पड़ेगी।
जरूरत से आधा भी नहीं आएगा पानी
रेलवे की ओर से पानी परिवहन के लिए करीब 50 से 52 वेगन दिए जाएंगे। इस 50-52 वेगन की रेलगाड़ी के पाली तक रोजाना चार फेरे करने पर पाली 10 एमएलडी (100 लाख लीटर) पानी पहुंचेगा। जो पाली की जरूरत के हिसाब से आधा भी नहीं है। ऐसे में पाली शहर व आस-पास के गांवों की प्यास बुझाना जलदाय विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। जबकि, सच ये है कि वर्तमान में 72 घंटे में हो रही जलापूर्ति में भी विभाग को 300 लाख लीटर प्रतिदिन पानी की आवश्यकता है।
वर्ष 2016 में ट्रेन पहुंची थी, लेकिन तभी बरस गए थे मेघ
वर्ष 2016 में भी पाली के सबसे बड़े जलस्रोत जवाई बांध में पानी खत्म हो गया था। जलदाय विभाग की ओर से ट्रेन मंगवा ली गई थी। जवाई बांध में तीन जुलाई को महज दो दिन का पानी शेष रहा था। इसके बाद इन्द्र ने नाराजगी तोड़ी और चार जुलाई को झमाझम बरसात का दौर शुरू हो गया था। इस पर ट्रेन चलाने की जरूरत नहीं पड़ी थी और शहरवासियों को जल संकट का सामना भी नहीं करना पड़ा था।
प्रस्ताव बनाकर भेजा
हमारी तरफ से 16 जुलाई से ट्रेन की जरूरत पडऩे को लेकर 13 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जो वित्त मंत्रालय से स्वीकृत होने के बाद रेलवे को राशि दी जाएगी। इसके अलावा हौदियों आदि का कार्य करवाया जाएगा।
राजेश अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, पाली





No comments:
Post a Comment