सादड़ी. कुम्भलगढ़ में प्रस्तावित नेशनल पार्क के विरोध में स्वर उभरने तेज हो गए हैं। किसान, राईका, पशुपालक व आदिवासी अपने सामुदायिक अधिकार २००६ लागू कराने की मांग को लेकर आगामी दिनों में प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सभाएं आयोजित कर यहां से लिए गएसर्वसम्मत प्रस्ताव सरकार व प्रशासन को भिजवाएंगे। ताकि समय रहते प्रशासन इनकी सुनवाई नए सिरे से शुरू करे। इसके लिए पुणे महाराष्ट्र कला पावर रक्षा संस्थान भी लोकहित पशुपालक संस्थान से जुड़कर क्षेत्र में इनदिनों काम कर रहा है। लोकहित पशुपालक संस्थान निदेशक हनवन्तसिंह राठौड़ ने बताया कि सरकार व वनविभाग कुम्भलगढ़, रावली टाटगढ़ अभयारण्य व उदयपुर अंचल से अंाशिक वन क्षेत्र को मिलाते हुए प्रस्तावित कुम्भलगढ़ नेशनल पार्क व टाइगर पुनर्वास योजना बनाने जा रही है। इसको लेकर नवम्बर 2011 में प्रारम्भिक अधिसूचना जारी हुई। जिसमें इसके दायरे में आने वाले क्षेत्रों से आपत्तियां व दावे मांगे गए। जिसकी तय समय सीमा में लोकहित पशुपालक संस्थान ने पाली जिले की सीमा में 41 ग्राम पंचायतों से ग्राम सभाओं के सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करवाकर सामूहिक वनअधिकार 2006 लागू करने का आग्रह किया। जिन्हें प्रशासन व वनविभाग ने पूरी तरह नकारते हुए आपत्तियां नजरअन्दाजकर दी। उन्होंने कहा कि उद्यान की अन्तिम सूचना प्रकाशित हो इससे पहले प्रत्येक ग्राम पंचायत पर फिर सर्वसम्मत प्रस्ताव लेकर नए सिरे से न्यायालय के द्वार जाएंगे। गुरुवार को ग्राम जाटों का गुडा अधिनस्थ जोबा ग्राम की चौपाल पर संस्थान पदाधिकारियों के साथ ग्रामीणों से उनके सामुदायिक अधिकारों पर चर्चा की। उन्हें उद्यान के दायरे में रहने पर आने वाली समस्याओं से अवगत करवाया। ग्रामीणों ने कहा कि सामुदायिक अधिकार ग्राम का अधिकार है। इसमें धार्मिक तीर्थ, मन्दिर, मस्जिद, परम्परागत जलस्रोत पर गांव का अधिकार है। जिन्हे बाहर रखना होगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले जूणा, लाटाड़ा व जोबा ग्राम का वर्ष २०१२ में ग्रामसभा के प्रस्ताव लेकर उपलब्ध करवाए, जिन्हें नजर अन्दाज कर दिया गया। उन्होंने बताया कि संस्थान इसे शीघ्र उच्च न्यायालय में चुनौती देगा।
ये तीर्थ हमारी आस्था
परशुराम मंदिर, सूर्यमन्दिर, शक्तिमाता जैसे धार्मिक तीर्थ हमारी आस्था के केन्द्र हैं। हम इनके सर्वांगीण विकास को कृत संकल्पित हैं। सरकार प्रस्तावित उद्यान के दायरे से इन्हें बाहर रख कर हमारी भावनाओं को आहत न करे। सभी प्रवाशी शीघ्र प्रधानसेवक, मुख्यमन्त्री व केन्द्रीय वन मन्त्री को पत्र प्रेषित कर इस ओर ध्यानाकर्षण करवाएंगे।
जीवनराज पुनमिया, सादड़ी हाल प्रवासी इचलकरणजी
सरकार भावनाओं का सम्मान करें
परशुराम महादेव हमारी श्रद्धा व आस्था का केन्द्र है। सरकार इसे वनविभाग के दायरे से बाहर रख हमारी धार्मिक भावनाओं का सम्मान रखे। हमारा विरोध ये तीर्थ बाहर नहीं आने तक जारी रहेगा। जरूरत हुई तो जनआन्दोलन किया जाएगा।
शंकरलाल भाटी, सादड़ी
उद्यान की सीमा से बाहर रखें
सरकार व वनविभाग धार्मिक भावनाएं भड़काने की बजाय सभी धार्मिक तीर्थों को उद्यान सीमा के दायरे से बाहर रखकर श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करे। मैं प्रधानमन्त्री, मुख्यमन्त्री सहित केन्द्रीय वन मन्त्री का सदैव ध्यानाकर्षण इस मुद्दे पर रहे, इसको लेकर पत्र प्रेषित करूंगा।
राजू बेनिवाल, किसान, सादड़ी





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