मोहम्मद इलियास/ उदयपुर
जिले के वल्लभनगर तहसील कार्यालय के कार्मिकों की शिकायत से एक दिन पहले हटाए गए वल्लभनगर तहसीलदार संदीप अरोड़ा व उनकी पत्नी निशा की गाडिय़ों में एसीबी को 2.84 लाख रुपए की राशि मिली। एसीबी को यह राशि रिश्वत की होने की शिकायत पर टीम ने दोनों गाडिय़ों को देबारी से आगे रुकवाते हुए तलाशी ली थी। एसीबी टीम को देख दोनों एक बार हक्के बक्के रह गए। बरामद राशि के बारे में पति-पत्नी कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाए। ब्यूरो की टीम देर रात तक तहसीलदार के आवास की तलाशी में जुटी थी। ब्यूरो के एएसपी सुधीर जोशी ने बताया कि तहसीलदार संदीप अरोड़ा व उसकी पत्नी निशा अरोड़ा द्वारा वल्लभनगर में लोगों से रिश्वत की राशि लेकर अलग-अलग गाडिय़ों में उदयपुर आने की शिकायत मिली थी। इस पर टीम ने दोनों गाडिय़ों को देबारी जिंक तिराहे के पहले उन्हें रोक तलाशी ली। तहसीलदार की निजी गाड़ी को उसका परिचित लक्ष्मीलाल डांगी चला रहा था, टीम ने गाड़ी की तलाशी ली तो उसमें 1.08 लाख रुपए की राशि मिली। इसी तरह उसकी पत्नी निशा अरोड़ा की गाड़ी को उसका पुत्र चला रहा था, तलाशी में उस गाड़ी में 1.76 लाख रुपए नकद मिले। राशि के बारे में तहसीलदार के कोई संतोषप्रद जवाब नहीं देने पर ब्यूरो ने जब्त की। सीआई हरीशचन्द्र सिंह व हनुवंत सिंह मय टीम ने तहसीलदार के बडग़ांव महावीर कॉलोनी में स्थित आवास की तलाशी ली। देर रात तक वहां तलाशी जारी थी।
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कार्मिकों ने की थी शिकायत
ब्यूरो अधिकारियों ने बताया कि तहसीलदार अरोड़ा के विरुद्ध तहसील कार्यालय के कार्मिकों ने दुव्र्यवहार की एडीएम प्रशासन को एक दिन पहले ही शिकायत की थी। शिकायत पर जिला कलक्टर के आदेश पर एडीएम ने तहसीलदार अरोड़ा को हाथोंहाथ एपीओ करते हुए राजस्व मंडल अजमेर में उपस्थिति के निर्देश दिए थे। कार्मिकों ने तहसीलदार पर सरकारी पत्रों को फेंकने, अभद्र भाषा का प्रयोग कर परेशान करने के आरोप लगाए थे। इधर, कार्रवाई होने पर ग्रामीणों ने ब्यूरो अधिकारियों के समक्ष हर्ष जताया। ग्रामीणों का कहना था कि तहसीलदार कभी भी अपने कार्यालय में नहीं बैठता था, रजिस्ट्री व अन्य कार्य अपने क्वार्टर में ही करता था। मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र सहित छोटे-मोटे कार्य के लिए भी पैसे देने पड़ते थे।
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बैंकों के सिक्यूरिटी गार्ड के पास ही फर्जी लाइसेंस, हथियार लेकर बैंकों में कर रहे थे नौकरियां
- जम्मूकश्मीर, नागालैंड व मध्प्रदेश के है लाइसेंस
- पैसे देकर बनवाए, पुलिस जुटी पूछताछ में
उदयपुर. फर्जी हथियार लाइसेंस बनाकर पिछले डेढ़ साल से बैंकों में सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी करते पुलिस ने चार गार्ड को गिरफ्तार कर हथियार बरामद किए। पूछताछ में यह लाइसेंस मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना,नागालैंड के दीमापुर व जम्मूकश्मीर के उधमपुर के बने हुए है जिन्हें दलालों को पैसा देकर बनाना सामने आया है। पुलिस अभी सिक्यूरिटी एजेन्सी के प्रबंधक व बैंक अधिकारियों से पूछताछ के साथ ही लाइसेंस के बारे में तफ्तीश में जुटी है।
एसपी कैलाशचन्द्र विश्नोई ने बताया कि जिले के समस्त थानाधिकारी व स्पेशल टीम को विभिन्न वाणिज्यिक एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर लगे निजी सिक्यूरिटी गार्ड के हथियार लाइसेंस की जांच के आदेश दिए थे। स्पेशल टीम प्रभारी गोवर्धनसिंह भाटी ने कांस्टेबल योगेश, प्रहलाद, तपेन्द्र के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा की सरदारपुरा, चरक हॉस्टल व सलूम्बर तथा सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सेक्टर-4 स्थित शाखाओं पर लगे सिक्योरिटी गार्ड के हथियारों के लाइसेंस के जांच की। सभी के पास 12 बोर राइफल के हथियार के फर्जी लाइसेंस मिले। टीम ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर अलग-अलग थानापुलिस के सुपुर्द किया।
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केस-1
शाखा- बैंक ऑफ बड़ौदा सरदारपुरा शाखा
गार्ड- उमरी भिंड मध्यप्रदेश निवासी बुद्धङ्क्षसह पुत्र रमेश सिंह
लाइसेंस- भिंड मध्यप्रदेश
जांच - लाइसेंस फर्जी
खुलासा - पैसे देकर बनवाया लाइसेंस
भूपालपुरा थानाधिकारी राजेश यादव कर रहे कार्रवाई।
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केस-2
शाखा- बैंक ऑफ बड़ौदा चरक हॉटल के सामने की शाखा
गार्ड- धीरवल का पुरा मुरैना मध्यप्रदेश निवासी महिपालङ्क्षसह पुत्र पुरुषोत्तम सिंह
लाइसेंस- उधमपुर जम्मूकश्मीर
जांच - भाई बलवीर सिंह के नाम निकला फर्जी लाइसेंस
खुलासा- गांव के युवक को पैसा देकर बनवाया, दोनों भाई कभी नहीं गए उधमपुर
अम्बामाता थानाधिकारी चेनाराम पचार कर रहे कार्रवाई।
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केस-3
शाखा- बैंक ऑफ बड़ौदा सलूम्बर शाखा
गार्ड- मुरैना मध्यप्रदेश निवासी नारायणङ्क्षसह पुत्र इन्दरसिंह
लाइसेंस- दीमापुर नागालैंड
जांच - फर्जी निकला
खुलासा- गांव के युवक को पैसा देकर बनवाया
सलूम्बर थानाधिकारी रामेश्वरलाल कर रहे कार्रवाई
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केस-4
शाखा- सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया सेक्टर-4 शाखा
गार्ड- बड़ीसादड़ी चित्तौडगढ़़ निवासी गोपालसिंह पुत्र रामसिंह
लाइसेंस- दीमापुर नागालैंड
जांच - फर्जी निकला
खुलासा- पैसा देकर बनवाया
हिरणमगरी थानाधिकारी डॉ.हनवंतसिंह कर रहे कार्रवाई
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मामले दर्ज, अपराधिक रिकॉर्ड की जांच
- 4 थानों में मामले दर्ज, सभी गार्ड गिरफ्तार
- बीओबी में लगे तीन सिक्यूरिटी गार्ड- टाइगर फोर्स सिक्योरिटी एजेन्सी दिल्ली के
- सीबीओआई में लगा सिक्यूरिटी गार्ड - बोम्बे इंटेलीजेंस एजेन्सी जयपुर का
- संबंधित राज्यों में लाइसेंस की पुलिस करेगी जांच
- चारों गार्डो के अपराधिक रिकॉर्ड को भी टटोला जा रहा
- डेढ़ वर्ष से फर्जी लाइसेंस से बैंकों में कर रहे थे नौकरी





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