सादड़ी. परशुराम महादेव कुण्डधाम पुजारी के पास ५५९ साल पुराना एक ताम्रपत्र मिला है। जो उनके पूर्वजों को महाराणा मेवाड़ ने विक्रम सवंत् १५१७ वैशाख शुक्ला पूर्णिमा को प्रदान किया था। पुजारी परिवार ने यह ताम्रपत्र कुण्डधाम ट्रस्ट को उपलब्ध करवाया। जिसका हिन्दी रूपान्तरण करवाया जा रहा है। जिसकी प्रमाणिक पुष्टी व पुख्ता हिन्दी रूपान्तरण के बाद इसे पाली जिला प्रशासन व विभाग को मुहैया करवाया जाएगा। ताकि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं के अनुसार परशुराम तीर्थ मंदिर को प्रस्तावित कुम्भलगढ़ नेशनल पार्क से बाहर रखा जा सके।
परशुराम महादेव मंदिर, सूर्यमन्दिर, शक्तिमाता सहित धार्मिक स्थल, पेयजल सिंचाई जलस्रोत को उद्यान की सीमा से बाहर रखने की मांग को लेकर क्षेत्रवासी आन्दोलनरत हैं। जिला कलक्टर दिनेशचन्द जैन ने इस साक्ष्य व प्रमाणिक सबूतों को दबाए रखने की बजाय सरकार, प्रशासन व वन विभाग को मुहैया करवाने का आग्रह किया। अरावली पर्वतमालाओं में बाबा परशुराम महादेव तीर्थ काफी प्राचीन है। मारवाड़ व मेवाड़ रियासत के दौरान कई राजा महाराजाओं ने इन धार्मिक तीर्थों के संरक्षण के लिए सैकड़ों बीघा भूमि प्रदान की। इनके ताम्रपत्र भी उन्होंने पुजारी परिवारों को भेट किए। धार्मिक तीर्थो की जैसे-जैसे महत्ता बढ़ती गई, श्रद्धालुओ की आवाजाही बढ़ती गई। कई सन्त महात्माओं ने पवित्र तीर्थों पर तप-साधना कर इनका सर्वांगीण विकास करवाया। जिनकी समाधियां व उन पर खुदे शिलालेख भी इसकी पुष्टी करती हैं। परशुराम तीर्थ श्रद्धालुओं की प्रगाढ़ आस्था का केन्द्र बन गया है। दो जिलों की सीमाओं में होने से तीर्थ का विकास अवरूद्ध हो गया। अरावली की वनभूमि आज कुम्भलगढ़ अभयारण्य से प्रस्तावित नेशनल पार्क में तब्दील हो रही है। प्रशासन व वन विभाग ने इससे जुड़ी आपत्तियों व दावों का निस्तारण कर लिया है। परशुराम महादेव मंदिर को इसके दायरे में रखने से लोगों में आक्रोश फैल गया। लोग आन्दोलन करने लगे। इसको उद्यान सीमा से बाहर रखने की मांग को लेकर जयपुर-दिल्ली तक लोगों ने अपनी मांग उठाई। धार्मिक भावनाओं को देखते इस पर नए सिरे से मशक्कत शुरू हो गई। प्रशसन व विभाग ने ७५ साल पूर्व का कब्जा सिद्ध करने को साक्ष्य उपलब्ध कराने को क हा है। परशुराम कुण्डधाम ट्रस्ट उपाध्यक्ष एडवोकेट मदन लुहार ने बताया कि कुण्डधाम पुजारी परिवार के पूर्वजो को मेवाड़ रियासत के दौरान विक्रमसंवत् १५१७ वैशाख शुक्ला पूर्णिमा को प्रदान ताम्रपत्र ट्रस्ट को उपलब्ध करवाया है। इसका हिन्दी रूपान्तरण करवाया जा रहा है। मंगलवार को कुण्ड़धाम पर दानदाता से निर्मित एक हाल पिलर पर ९३ साल पूर्व विक्रम संवत १९८३ का खुदा शिलालेख दिखाया। जिस पर उन्होंने बतौर साक्ष्य प्रशासन व वनविभाग को मुहैया करवाने को कहा है। परशुराम तीर्थ फुटादेवल सेवा समिति ने १२५ साल पुराना दस्तावेज, २३ बीघा खातेदारी भूमि अधिकार के मेवाड रियासत दौरान फैसला कॉपी जिला प्रशासन को सौंप दी है।
प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बताउंगा वेदना
मैं मुख्यमन्त्री, प्रधानमन्त्री व केन्द्रीय वनमन्त्री को पोस्टकार्ड लिखकर श्रद्धालुओ की वेदना से अवगत करवाऊं गा। ताकि समय रहते यह तीर्थ प्रस्तावित उद्यान से बाहर रखा जाए। इसके दायरे में रखे जाने पर इसका विकास अवरूद्ध हो जाएगा।
श्याम सैन, व्यवसायी, सादड़ी
लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र
ग्रामीणों की जनभावना को सरकार नजर अन्दाज नहीं करे। परशुराम महादेव सहित धार्मिक तीर्थों को उद्यान के दायरे बाहर रखा जाए। जिससे श्रद्धालुओं की निरन्तर आवाजाही बनी रहे। जनसहयोग से इनका सर्वांगीण विकास हो। यह तीर्थ आज देश भर के लाखो श्रद्धालुओ की आस्था केन्द्र है।
लक्ष्मणसिंह राजपुरोहित, मादा
लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत न हों
प्राचीन परशुराम महादेव तीर्थ के सरकार प्रशासन व वन विभाग यहां संचालित ट्रस्ट व पुजारियों से प्रमाण मांग रहा है। उनके पास वर्षों प्राचीन ताम्रपत्र व खातेदारी अधिकार रियासतों से प्रदान किए हुए हैं। इसके बावजूद परशुराम तीर्थ को इसके दायरे में रखना न्यायोचित नहीं हैं। हमारी धार्मिक भावनाएं आहत नहीं की जाए। सरकार व प्रशासन सक्रियता दिखाते हुए मंदिर को बाहर रखे।
कमलेश कुमार बोहरा, व्यवसायी ईरोड





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