कुछ समय पहले ये स्कूल बदहाल था, लेकिन अब किसी मॉडल से कम नहीं है... इंग्लैंड से भारत आए एक दल ने उदयपुर के स्कूल का कायाकल्प करने के लिए अपनी जेब से लाखों रुपए खर्च किए। दल के सदस्यों ने सेक्टर ११ क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, माछला मगरा में अपने हाथ से न केवल रंग-रोगन किया, बल्कि दीवारों पर कई ज्ञानवद्र्धक तस्वीरें भी उकेरी।
प्रवासी भारतीय की मेहनत
प्रधानाध्यापक मदनलाल सिंघाडि़या ने बताया कि मूलत: नागौर निवासी उनके रिश्तेदार बीएल नवल इंग्लैंड के पर्थ में रहते हैं। एक कार्यक्रम के दौरान सिंघाडि़या ने उन्हें स्कूल के बारे में बताया था। नवल ने पर्थ में इस समूह से चर्चा की।
बच्चों से मिलते ही पिघला दिल
बाद में इस दल से सिंघाडि़या की मुलाकात हुई। करीब ५० सदस्यीय दल स्कूल में अध्ययनरत बच्चों से भी मिला। उन बच्चों के प्रति कुछ करने की उनके मन में एेसी भावना जागी कि वे अपना सब काम छोड़कर इस स्कूल का कायाकल्प करने में जुट गए। छुट्टी होने के बाद पूरा दल स्कूल में पहुंचकर इसे बेहतर बनाने में जुट जाता है। घंटों काम करता रहता है।
खर्च किए साढ़े आठ लाख रुपए
दल ने स्कूल पर करीब साढे़ आठ लाख रुपए खर्च कर सभी कमरों को स्मार्ट क्लास रूम में तब्दील किया।
दीवारों पर सूरज-चांद और बादल
दल ने अपने हाथों से दीवारों पर कई देशों के झंडे और नाम लिखे हैं। सप्ताह-दिनों के नाम, सूरज, चांद, आसमान, बादल, पहाड़े, पशु, तितलियां, पेड़-पौधे की तस्वीरें उकेरी हैं। कक्षा की फर्श पर सांप-सीढ़ी, दीवारों पर इन्द्रधनुष बनाए हैं। इनके माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाता है। कई बार दल के सदस्य स्कूल में ही भोजन करते थे, वहीं काम करते हुए थक कर फर्श पर ही सो जाते थे।
सात दिन में बदली सूरत
सिंघाडि़या के अनुसार दल के सदस्य ग्रीनलैंड नामक एनजीओ के सदस्य हैं। हैदराबाद निवासी मंदीप और उदयपुर की याशिका का भी खासा सहयोग मिला। २१ से २७ जुलाई के बीच यह काम किया। हर कक्ष में पर्यावरण की तस्वीरें, वर्ण व स्वर, कुछ पुस्तकें भी उन्होंने उपलब्ध कराई हैं।
एनजीओ ने स्कूल लिया गोद
सिंघाडि़या ने बताया कि नीलांजना एनजीओ ने भी स्कूल को गोद लेकर कई कार्य कराए। कुर्सी-टेबल के अलावा पानी का एक जापानी तकनीक से प्याऊ लगाया गया। स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से टीन शेड, हैंडपंप पर मोटर व दरी पट्टियां मंगवाई गई हैं।





No comments:
Post a Comment