उदयपुर. जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डिम्ड टू बी विवि की ओर से स्थापित मीरा पीठ की सोमवार को प्रतापनगर स्थित प्रशासनिक भवन के सभागार में कुलपति एसएस सारंगदेवोत की अध्यक्षता में बैठक हुई। सारंगदेवोत ने बताया कि मीराबाई के त्याग एवं बलिदान को आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से इसकी स्थापना हुई है। मीरा के त्याग, बलिदान, आदर्श एवं जीवनी पर रिसर्च एवं अंतरराष्ट्रीय सेमीनार आगामी अक्टूबर में होगा। अगस्त माह के पहले सप्ताह में संत मुरारी को संगोष्ठी के लिए आमंत्रित करने के लिए कुलपति मिलने जांएगे। बैठक में तय हुआ कि मीरा की जीवन, चारित्रिक एवं बलिदान की गाथाओं की पुस्तक तथा स्मारिका का प्रकाशन होगा। कुलपति ने कहा कि मीराबाई आस्था एवं श्रद्धा का प्रतीक है। वे सम्पूर्ण नारी समाज का गौरव है। भक्ति एवं शक्ति की निर्मल धाराओं से युक्त पावन गंगा के समान है।
केन्द्रीय विवि सागर के चांसलर प्रो. बलवंत जॉनी ने कहा कि मीरा के व्यक्तिव एवं कृतित्व पर हर माह संगोष्ठी का आयोजन होगा, जिसमें देश भर से शिक्षाविदें को बुलाया जाएगा। मीरा पर कार्य करने वाले लोगों को इससे जोड़ा जाएगा। मीरा पर विभिन्न भाषाओं में लिखित ग्रंथो का हिन्दी में अनुवाद होगा। मीरा पर वेब पेज तैयार होंगे। इतिहासविद् राजशेखर व्यास ने कहा कि मीरा की जन्म से लेकर अंत की सारी जानकारी जुटा उनका प्रकाशन हो। साथ अब तक किए गए कार्यो को मीरा पीठ में संग्रहित हो। मीरा पर कार्य करने वाले शोधार्थियो को फैलोशिप दी जाएगी। मीरा के बिना मेवाड़ का इतिहास ही अधूरा है। उन्होने कहा कि इस पर ओर अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। मानक निदेशक प्रो. कल्याण सिंह शेखावत ने मीराबाई के उपर किया गया पब्लिक वर्क एवं मेन स्क्रीप्ट की सूची तैयार होगी। विद्यापीठ परिसर में अलग से मीरा भवन बनेगा, जिसमें नाट्यशाला, पुस्तकालय, शोध कक्ष, ऑडियो . विजियोअल कक्ष तथा उन पर एक डाक्युमेन्ट्री फिल्म तथा वेबसाइट् भी बनेगी। विश्वविद्यालय का सौभाग्य है कि वह मेवाड़ की मीरा की जीवनी को आमजन तक पहुुंचाने का सार्थक प्रयास करेगी। इतिहासविद् केएस गुप्ता, जीएम मेहता, जीवनसिंह खरकवाल, डॉ. अमिया गोस्वामी, डॉ. प्रकाश शर्मा, डॉ. कुल शेखर व्यास एवं अन्य ने इस मौके पर विचार व्यक्त किए।





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