कोटा. शहर में गति सीमा व यातायात नियमों ( traffic rules ) के संकेतकों का भले ही टोटा हो, लेकिन चालान काटने में यातायात पुलिस (Traffic Police ) किसी तरह की कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही। इसके चलते ई कैमरे ( cameras ) की नजर में आने पर निर्धारित गति सीमा ( Vehicle speed ) से 1 किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार भी अधिक हो, तो ई-चालान आपके घर पहुंचना पक्का है। (E-Traffic Invoice sent to Home ) खास बात यह है कि इसमें से अधिकांश ई-चालान रात में सूनी सड़क पर निकलने वाले वाहनों के बन रहे हैं।
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शहर में एरोड्राम (Erodem circle kota) से विज्ञाननगर ( Vigyan Nagar ) के बीच एयरपोर्ट ( Kota Airport ) के सामने नगर निगम (Nagar Nigam ) के डिस्प्ले बोर्ड पर ही ई-चालान के लिए यातायात पुलिस ने कैमरे लगाए हुए हैं। कैमरे 60 किलोमीटर प्रतिघंटा से एक किलोमीटर अधिक गति से निकलने वाले वाहन का फोटो ले लेते हैं।
इस आधार पर वाहन का फोटो यातायात पुलिस के अभय कमांड सेन्टर स्थित अत्याधुनिक मशीनों पर आ जाता है। यह आरटीओ से लिंक होने से वाहन की पूरी जानकारी भी इस पर आ जाती है। इसके बाद यातायात नियमों की अवहेलना व कमियों के हिसाब से चालान बनाया जाता है। अधिक गति में वाहन चलाने का चालान 4 सौ रुपए वसूला जा रहा है। इसके अलावा सीट बेल्ट व अन्य वाहन की कमियां व यातायात नियमों की अवहेलना की रकम भी इसमें जोड़ दी जाती है।
वसूली के लिए सबकुछ, आमजन के लिए सूचना तक नहीं
यातायात पुलिस की ओर से वाहन चालकों से वसूली के लिए ई-चालान से लेकर ई-चालान मशीनों की व्यवस्था है, लेकिन यातायात विभाग व पीडब्ल्यूडी की ओर से वाहन चालकों के वाहन की गति सीमा तक के संकेतक नहीं लगा रखे। ऐसे में वाहन चालक इस व्यवस्था से अनजान है। उनके घर पर चालान पहुंचने पर उन्हें पूरे मामले का पता लगता है। जबकि चालान या जुर्माना वाहन चालकों की समझाइश करने के बावजूद न मानने पर लगाया जाना चाहिए। ऐसे में वाहन चालकों को फटका लग रहा है। हालांकि यातायात पुलिस ने इस मामले में कुछ राहत दी।
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यातायात नियमों के संकेतकों का भी टोटा
शहर में वाहनों की गति सीमा के अलावा यातायात नियमों समेत आसपास भीड़भाड़ वाले क्षेत्र, स्कूल, अस्पताल व अन्य जोन दर्शाने वाले संकेतक भी शहर में अंगुलियों पर गिनती के बराबर है। ऐसे में वाहनचालकों को किस जोन में कैसे वाहन चलाना है, यह पता नहीं चल पाता। इसके चलते जिम्मेदार वाहन चालकों को भी मामले का पता नहीं लग पाता। मुख्य मार्ग के अलावा शहर के भीतर तो वाहनों की गति छोड़ किसी भी प्रकार के बोर्ड नहीं है।
हर माह लाखों रुपए के चालान
यातायात पुलिस हर माह ई-चालान, पार्किंग जोन के अभाव में नॉन पार्किंग प्लेस में खड़े वाहनों समेत यातायात नियमों की अवहेलना करने पर लाखों रुपए प्रतिमाह का चालान बनाती है। वर्षभर में यह राशि एक करोड़ के आंकड़े को भी पार कर जाती है, लेकिन इसके बावजूद आमजन के लिए पार्किंग के स्थानों के विकास, गति संकेतक, यातायात नियमों के संकेतक के लिए साधनों का टोटा है। ऐसे में आमजन अपने को ठसा सा महसूस कर रहा है।
यातायात नियमों की अवहेलना करने वालों का ही चालान बनाया जा सकता है। शहर में तेजी से वाहन बढ़ रहे हैं। ऐसे में शहर में पार्किंग के स्थानों का चयन कर सरकार को प्रस्ताव भेजे गए हैं। इस आधार पर नए पार्किंग स्थलों को विकसित करने की प्रकिया चल रही है। चालान के अलावा वाहन को तेज गति से नहीं चलाने व यातायात नियमों की पालना के लिए लोगों की समझाइश भी की जाती है।
नारायणलाल विश्नोई, पुलिस उप अधीक्षक, यातायात पुलिस, कोटा।





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